अतीत का अनुभव
व्यक्त होता जाता
अनेकानेक रूप लिए
तारतंय नहीं रहा
परिवर्तन का सत्य मिटाता रहता
अनुभूति का सत्य
बदलती पृष्ठभूमि मे
छूट गये अर्थ
दिशा बोधक बन जाते
ओर हो जाती
राहे साफ सूथरी उजाले भरी
अब नहीं वह मूल स्वरूप
खरा नहीं रह पाया
खिचकती जिन्दगी के पहिये
खो चूके असलीपन
घीसते घीसते
अब ढूँढता जाता
व्यक्त होने के नये ढंग
ओर दिखाता जाता बेढंगापन
नहीं जी पाता
जैसा हूँ बदलता हूँ शक्ल
छिपाता जाता असलियत
विकृति का सौन्दर्य
अनुठापन लिए हर ओर
देता जाता
अज्ञात चमक भरा सत्य
कि असली सत्य ढक ढक जाता
जीता जागता मानव
खेलता जाता
मदहोशी के खेल अतुलनीय
ओर बढते
रंगते जाते जिन्दगी का केनवास
उभरते आकार लेते
सत रंगी ताने बाने
कि खोया यथार्थ ढूँढे नही मिलता
गगनचुम्बी इरादो की दुनिया
अब नहीं चाहती धरातल
जहाँ मूल रस जिन्दगी ओर उसकी
गहराई देता
ओर इसी गहराई की मजबूती पर
इरादे आकार पाते
गगन स्पर्शी हकीकत मे
कि ऊँचाई दे सके असल मे
सुनो
काम लायक तो नहीं
पर अनुभूति का सार
एक कतरा रश्मि
तुम्हारी दिशा को उजाला
जरूर देगा।
छगन लाल गर्ग।
व्यक्त होता जाता
अनेकानेक रूप लिए
तारतंय नहीं रहा
परिवर्तन का सत्य मिटाता रहता
अनुभूति का सत्य
बदलती पृष्ठभूमि मे
छूट गये अर्थ
दिशा बोधक बन जाते
ओर हो जाती
राहे साफ सूथरी उजाले भरी
अब नहीं वह मूल स्वरूप
खरा नहीं रह पाया
खिचकती जिन्दगी के पहिये
खो चूके असलीपन
घीसते घीसते
अब ढूँढता जाता
व्यक्त होने के नये ढंग
ओर दिखाता जाता बेढंगापन
नहीं जी पाता
जैसा हूँ बदलता हूँ शक्ल
छिपाता जाता असलियत
विकृति का सौन्दर्य
अनुठापन लिए हर ओर
देता जाता
अज्ञात चमक भरा सत्य
कि असली सत्य ढक ढक जाता
जीता जागता मानव
खेलता जाता
मदहोशी के खेल अतुलनीय
ओर बढते
रंगते जाते जिन्दगी का केनवास
उभरते आकार लेते
सत रंगी ताने बाने
कि खोया यथार्थ ढूँढे नही मिलता
गगनचुम्बी इरादो की दुनिया
अब नहीं चाहती धरातल
जहाँ मूल रस जिन्दगी ओर उसकी
गहराई देता
ओर इसी गहराई की मजबूती पर
इरादे आकार पाते
गगन स्पर्शी हकीकत मे
कि ऊँचाई दे सके असल मे
सुनो
काम लायक तो नहीं
पर अनुभूति का सार
एक कतरा रश्मि
तुम्हारी दिशा को उजाला
जरूर देगा।
छगन लाल गर्ग।