अंतर रहता हैं
विचार ओर कर्म का
ठीक वैसे ही
सरल कठिन का आभास मात्र
विचारों की शास्वतता
हिला देता
फिर पुख्तापन ढूँढ लाते विचार
सरल जटिल की विवेचना मे
घसीटे जाते
गाँधी से लेकर भगत सिंह
ओर होता सत्य वहीं
जो अधिक सुहाता
हर किसी को लगता कर्म योग्य
वहीं तर्क संगत भी
ओर सत्य भरा भी
सत्य आज विमोहित हैं
तृष्णाओ से
विचार ओर कर्म करते हैं पैरवी
आशक्ति मे खेलते जाते
जीवन का दाव
सौन्दर्य तरलता मे डूबते जाते
जीवन मूल्य
ओर मानवता विचारों मे
नित गढती जाती नये अर्थ
जिनमें हो नीजता का सार
कहीं न कहीं
अपनत्व घेरता स्वार्थ का कतरा
या कि तनिक ही सही
जीवन की मीठास मन चाही
आज अंतर हैं
सत्य के शाब्दिक अर्थ बदले जा चूके
मानवता का असली चेहरा
लहुलुहान होने से
घृणित हुआ
विलुप्ति की ओर धकेला
जाता रहेगा
आज का यही सत्य
विचार ओर कर्म मे झलक देता
सुशोभित हैं ।
छगन लाल गर्ग।
विचार ओर कर्म का
ठीक वैसे ही
सरल कठिन का आभास मात्र
विचारों की शास्वतता
हिला देता
फिर पुख्तापन ढूँढ लाते विचार
सरल जटिल की विवेचना मे
घसीटे जाते
गाँधी से लेकर भगत सिंह
ओर होता सत्य वहीं
जो अधिक सुहाता
हर किसी को लगता कर्म योग्य
वहीं तर्क संगत भी
ओर सत्य भरा भी
सत्य आज विमोहित हैं
तृष्णाओ से
विचार ओर कर्म करते हैं पैरवी
आशक्ति मे खेलते जाते
जीवन का दाव
सौन्दर्य तरलता मे डूबते जाते
जीवन मूल्य
ओर मानवता विचारों मे
नित गढती जाती नये अर्थ
जिनमें हो नीजता का सार
कहीं न कहीं
अपनत्व घेरता स्वार्थ का कतरा
या कि तनिक ही सही
जीवन की मीठास मन चाही
आज अंतर हैं
सत्य के शाब्दिक अर्थ बदले जा चूके
मानवता का असली चेहरा
लहुलुहान होने से
घृणित हुआ
विलुप्ति की ओर धकेला
जाता रहेगा
आज का यही सत्य
विचार ओर कर्म मे झलक देता
सुशोभित हैं ।
छगन लाल गर्ग।