Wednesday, June 8, 2016

बौद्धिकता

अलग बात होगी 
आज प्रबुद्ध मानव सोचता
करता ओर कहता
अब हर मानव मानता 
समझता समझदारी 
हर तथ्य का परीक्षण
अच्छी बौद्धिकता का सबूत
देता रहता कथन मे
पर परिणाम शून्य
अब होना होगा
युग काबलियत का हिस्सा
अपार संभावनायें
भरी पड़ी जिन्दगी मे
मानव सोच ओर चिंतन में
हर अन्वेषण
देता जाता रहस्य
रहस्यमय अवगुंठन की मानव
समूची परिक्रमा कर चुका
बौद्धिक कौशल
अब हैं पूरी तैयारी मे
आत्मिक बल के अभाव मे
भीतर की शक्ति टूट चुकी
आवरण नहीं आता समझ
खटखटाता रहता चेतना के द्वार
नहीं खुलते
दरवाजे का पुख्तापन
नहीं होता कंपित
भौतिक चेतना सिद्धांत
नहीं आता काम
ओर भीतरी भार झेलती
भौतिकता
सूक्ष्म का
करती जाती विद्रोह
होगा कैसे
सत्य का साक्षात्कार
बिना सत्य का अहसास पाये
गुमराह भटकाव भ्रमित हम
मुडो ना थोड़े
अलौकिक सत्ता से
पहचान निमित्त
शायद बात बने
ओर पा सको
वहीं जिसे ढूँढते
क ई जन्मों का
चक्रव्यूह घेरता हमें
हर पल
दिन मास वर्ष ओर जन्मो से
ज्ञान नहीं श्रृद्धा से
तनिक देखो जीवन
शायद नहीं रहे अधूरापन ।
छगन लाल गर्ग ।