अभिव्यक्ति पीडा से साक्षात्कार हैं
रह रह मिलते हैं
एक नई पीडा के अहसास का बिम्ब
लेने लगता आकार
अपना सा
एकरस होता बिम्ब
बन जाता जीवन का राग
पीडा कसक देती तो हैं
पर अभिव्यक्ति
आकार तू मेरा ही
पाती हैं ।
रह रह मिलते हैं
एक नई पीडा के अहसास का बिम्ब
लेने लगता आकार
अपना सा
एकरस होता बिम्ब
बन जाता जीवन का राग
पीडा कसक देती तो हैं
पर अभिव्यक्ति
आकार तू मेरा ही
पाती हैं ।