हमेशा देखता हूँ
साई बाबा चौखट पर
बेहिसाब लोगों की भीड़
एक राग एख ताल
याचनाओ का सैलाब लिए खड़ी हैं
ओर मैं
मैं भी जुड़ जाता हूँ
उनमें उन्हीं का एक अंश बनकर
भरता कहां दिल
याचना की भीड़ जोडता जाता हूँ
प्रतिक्रिया भीतर को ही देनी होती हैं
आराध्य भीतर ही तो हैं
वहीं से सन्तोष आश्वासन
लिए मुडता हूँ
घर की तरफ
पुलिये की चढान अब
उतराई बनती हैं
ठीक जीवन की ढलाई की तरह
नजरें हमेशा की तरह तलाशती हैं
यही तो मिलते हैं हम
दिल मे दुचिन्ता घिरने लगती हैं
आकृति घिरती हैं बिम्ब बनी
चढान चढता बूढ़ा शरीर
साइकिल ओर उसका तन
दोनों चढ़ान से संघर्ष करते हुए
एकाग्र ध्यानस्थ था मैं
गाड़ियों का आना जाना
लगता किसी ओर दुनिया का था
यकायक परिचित आवाज
मेरे कदम रूके
नमस्कार शब्द मीठा मेरा
अपना पहचान वाला
वहीं सफेद लम्बी दाढ़ी
झाकता सा अनुभवी चेहरा
चढान मे साइकिल से उतर जाया करो
मैने संवेदना दी
मुस्कान आयी
फिर उदासी घिरी
बाबूजी क्या बताऊ
समय पर नहीं पहुँचा तो
सेठ निकाल देगा
अफसर बेटे ने कुछ पैसे भैजे थे
तभी साइकिल खरीदी
मियाँ बिबि शहर हैं
कभी कभार खेर खबर लेते हैं
ओर मैं
मूक सुनता हूँ
साई बाबा से की याचनाओ मे
यही बिना मंदिर
भीतर की सारी उर्जा के साथ
एक याचना ओर जोडता हूँ
जो शायद
पहले
बिना देवालय के
सुनी जाने काबिल हैं ।
साई बाबा चौखट पर
बेहिसाब लोगों की भीड़
एक राग एख ताल
याचनाओ का सैलाब लिए खड़ी हैं
ओर मैं
मैं भी जुड़ जाता हूँ
उनमें उन्हीं का एक अंश बनकर
भरता कहां दिल
याचना की भीड़ जोडता जाता हूँ
प्रतिक्रिया भीतर को ही देनी होती हैं
आराध्य भीतर ही तो हैं
वहीं से सन्तोष आश्वासन
लिए मुडता हूँ
घर की तरफ
पुलिये की चढान अब
उतराई बनती हैं
ठीक जीवन की ढलाई की तरह
नजरें हमेशा की तरह तलाशती हैं
यही तो मिलते हैं हम
दिल मे दुचिन्ता घिरने लगती हैं
आकृति घिरती हैं बिम्ब बनी
चढान चढता बूढ़ा शरीर
साइकिल ओर उसका तन
दोनों चढ़ान से संघर्ष करते हुए
एकाग्र ध्यानस्थ था मैं
गाड़ियों का आना जाना
लगता किसी ओर दुनिया का था
यकायक परिचित आवाज
मेरे कदम रूके
नमस्कार शब्द मीठा मेरा
अपना पहचान वाला
वहीं सफेद लम्बी दाढ़ी
झाकता सा अनुभवी चेहरा
चढान मे साइकिल से उतर जाया करो
मैने संवेदना दी
मुस्कान आयी
फिर उदासी घिरी
बाबूजी क्या बताऊ
समय पर नहीं पहुँचा तो
सेठ निकाल देगा
अफसर बेटे ने कुछ पैसे भैजे थे
तभी साइकिल खरीदी
मियाँ बिबि शहर हैं
कभी कभार खेर खबर लेते हैं
ओर मैं
मूक सुनता हूँ
साई बाबा से की याचनाओ मे
यही बिना मंदिर
भीतर की सारी उर्जा के साथ
एक याचना ओर जोडता हूँ
जो शायद
पहले
बिना देवालय के
सुनी जाने काबिल हैं ।