दिल आप सा हमे गर खुदा ने दिया होता
मिल जाता फिर शकुन दर्द कुछ कम होता
फासला दिल यूँ ना होता मिलना भी होता
बढ़ता हैं हर रोज जख्म गिला भीनही होता
सुने नग्मे बहुत तन्हा दर्द सफाया न होता
भूले दुनिया का राग कभी अपना न होता
मिलाते राग हम सारा दिल पराया ही होता
नुस्खा पाये न जीने का हमे अफ़सोस होता ।
मिल जाता फिर शकुन दर्द कुछ कम होता
फासला दिल यूँ ना होता मिलना भी होता
बढ़ता हैं हर रोज जख्म गिला भीनही होता
सुने नग्मे बहुत तन्हा दर्द सफाया न होता
भूले दुनिया का राग कभी अपना न होता
मिलाते राग हम सारा दिल पराया ही होता
नुस्खा पाये न जीने का हमे अफ़सोस होता ।