शब्दों के चितेरे
हमें अर्थ देते हैं
अर्थ जो राह ढूँढता हैं
बेहतरीन जिन्दगी की
बिखरे विश्वासो की
अकथनीय गाथा
हर रोज सवेरे के साथ
इकजाई करता हैं
ओर हम
गाथा के अथाह मंझधार फसे
किनारा ढूँढते हैं
मेरे चितेरे
कहां पाये पतवार बिना किनारा
अनुभूति के मर्मज्ञ साथी
तुम्ही हो केवल तुम्ही।।
हमें अर्थ देते हैं
अर्थ जो राह ढूँढता हैं
बेहतरीन जिन्दगी की
बिखरे विश्वासो की
अकथनीय गाथा
हर रोज सवेरे के साथ
इकजाई करता हैं
ओर हम
गाथा के अथाह मंझधार फसे
किनारा ढूँढते हैं
मेरे चितेरे
कहां पाये पतवार बिना किनारा
अनुभूति के मर्मज्ञ साथी
तुम्ही हो केवल तुम्ही।।
-छगनलाल गर्ग