Friday, June 10, 2016

उन्माद नया

जब भी यह दिल अनमना हुआ जाता हैं 
तब ही यह दिल अनजानो से घीरता हैं 
हलचल हिलोर चक्रवात मन को हिलाते हैं 
होते भाव बेकाबू खामोश ऑसू निकलते हैं ।
गर कहीं डूबे का किनारा होता 
जरा ओर जी लेते सहारा होता
भाये ना भाये हम आसरा होता
झूठा ही दिलो का मिलना होता ।
जाये तो जाये कहां कोई हमसे ठिकाना तो कहें
लाये तो लाये किसे मेरा हैं कोन कोई हमसे कहें
खोये तो खोये क्या बचा हो कुछ तो कोई कहें
रोये हैं उम्र भर कहीं लम्हा खुशी का हो तो कहें ।
खोया राग कंठ सुखा हैं गाने गीत फिर आये हैं
रोया ऑसू रहे कहां पीर गहरी हुई फिर आये हैं
बोया बीज संवेदना गहरा अंकुर ले फिर आये हैं
सोये निन्द घनी वासना उन्माद नया ले आये हैं ।।
छगन लाल गर्ग।