खुद छिपा हूँ अपने से पता करोगे कैसे ।
दिखता लुभाता तुम्हें भीतर जाओगे कैसे ।
पर्त पर्त सतह दिखती तह पाओगे कैसे ।
किनारे की शोभा खोये गहराई मिले कैसे ।
आमंत्रण देती भाये लहरे तन डूबोये कैसे।
अस्तित्व रखना बनाये हार जाये भी कैसे ।
अंतर्द्वंद झेलता सा जीवन राह पाये कैसे ।
संघर्ष नेह बाधा व्यक्तित्व उड़ान भरे कैसे ।
चेतन प्राण चाहे गाना लय शब्द मिले कैसे ।
भीतर भार विस्तृत आबाद दिल रखे कैसे ।
राह मर्म पीर पिघली नजरों से निकले कैसे ।
विभत्स स्वार्थ का छाया आसरा पाये कैसे ।।
छगन लाल गर्ग।
दिखता लुभाता तुम्हें भीतर जाओगे कैसे ।
पर्त पर्त सतह दिखती तह पाओगे कैसे ।
किनारे की शोभा खोये गहराई मिले कैसे ।
आमंत्रण देती भाये लहरे तन डूबोये कैसे।
अस्तित्व रखना बनाये हार जाये भी कैसे ।
अंतर्द्वंद झेलता सा जीवन राह पाये कैसे ।
संघर्ष नेह बाधा व्यक्तित्व उड़ान भरे कैसे ।
चेतन प्राण चाहे गाना लय शब्द मिले कैसे ।
भीतर भार विस्तृत आबाद दिल रखे कैसे ।
राह मर्म पीर पिघली नजरों से निकले कैसे ।
विभत्स स्वार्थ का छाया आसरा पाये कैसे ।।
छगन लाल गर्ग।