अब कहोगे आस्था
तोडते अधर्मी तुम
माँ का इसी बहाने
नाम तो मिलता सुनने को
गरबे माता जी की
आस्था के चलायमान
चलते झुमते चित्र
आनन्द दायक भक्ति परक
मन आस्था से झुमता
आनन्द से होता लबालब
एक वातावरण भक्ति मय
जीवन का ईश्वरीय साक्षात्कार
श्रृद्धा से विभोर
आध्यात्मिक आभा का
साक्षात्कार
जीवन रहते केवल यही पाता
जहाँ संगीत
जहाँ नृत्य की मदहोशी
ओर कहां
फिर गुजराती के कोमल
गदराये महक देते शब्द
लय की वहीं सरलता भरी महक
झुमने का दुर्लभ अवसर
पर खेद केवल यह
कि सभ्यता की ताक झाक
यहाँ भी बढ़ी हैं
कुत्चितता के
गंदले कीड़े निरन्तर प्रगति पर हैं
यह प्रगति
सालती जजबात
सालती श्रृद्धा गहरी आस्था
भी हैं ।
छगन लाल गर्ग।
तोडते अधर्मी तुम
माँ का इसी बहाने
नाम तो मिलता सुनने को
गरबे माता जी की
आस्था के चलायमान
चलते झुमते चित्र
आनन्द दायक भक्ति परक
मन आस्था से झुमता
आनन्द से होता लबालब
एक वातावरण भक्ति मय
जीवन का ईश्वरीय साक्षात्कार
श्रृद्धा से विभोर
आध्यात्मिक आभा का
साक्षात्कार
जीवन रहते केवल यही पाता
जहाँ संगीत
जहाँ नृत्य की मदहोशी
ओर कहां
फिर गुजराती के कोमल
गदराये महक देते शब्द
लय की वहीं सरलता भरी महक
झुमने का दुर्लभ अवसर
पर खेद केवल यह
कि सभ्यता की ताक झाक
यहाँ भी बढ़ी हैं
कुत्चितता के
गंदले कीड़े निरन्तर प्रगति पर हैं
यह प्रगति
सालती जजबात
सालती श्रृद्धा गहरी आस्था
भी हैं ।
छगन लाल गर्ग।