Monday, June 13, 2016

भोला चेहरा

भोला चेहरा हाथ फैलाये
करूणा का सम्पूर्ण अस्तित्व 
दरवाजे के करीब दस फुट की दूरी पर
अभावो की प्रतिमा 
खडी हैं एक मासूम बालिका
रोटी की गुहार लगाती
मकान मालकिन क्रोध भरी 
ऑखे दिखाती
फटकारती हुई 
भगाती हुई
मैं गुजरता हूँ रोकती मुझे 
भाई साहब सुनो 
आपके बेटो की तीनो छोटी बच्चियो को
भेजना अभी
नव रात्रि का उद्धापन हैं 
उपवास खोलना हैं 
सभी बुकिंग हैं लड़कियाँ आज 
मैं स्वीकृति मे सिर हिलाता हूँ 
देखता इस बच्ची की तरफ
जिसको फटकार मिली हैं 
रोटी के टुकड़े के लिए
एक लम्बी श्वास निकलती हैं 
स्वतः बेलगाम
ओर वेदना का दरिया 
हिलोरे लेता सा
उफनता हैं 
यह उफान गहराये
कि पहले इसके
समाज ओर शासन को
संभलना होगा
छगन लाल गर्ग।