भोला चेहरा हाथ फैलाये
करूणा का सम्पूर्ण अस्तित्व
दरवाजे के करीब दस फुट की दूरी पर
अभावो की प्रतिमा
खडी हैं एक मासूम बालिका
रोटी की गुहार लगाती
मकान मालकिन क्रोध भरी
ऑखे दिखाती
फटकारती हुई
भगाती हुई
मैं गुजरता हूँ रोकती मुझे
भाई साहब सुनो
आपके बेटो की तीनो छोटी बच्चियो को
भेजना अभी
नव रात्रि का उद्धापन हैं
उपवास खोलना हैं
सभी बुकिंग हैं लड़कियाँ आज
मैं स्वीकृति मे सिर हिलाता हूँ
देखता इस बच्ची की तरफ
जिसको फटकार मिली हैं
रोटी के टुकड़े के लिए
एक लम्बी श्वास निकलती हैं
स्वतः बेलगाम
ओर वेदना का दरिया
हिलोरे लेता सा
उफनता हैं
यह उफान गहराये
कि पहले इसके
समाज ओर शासन को
संभलना होगा ।
छगन लाल गर्ग।
करूणा का सम्पूर्ण अस्तित्व
दरवाजे के करीब दस फुट की दूरी पर
अभावो की प्रतिमा
खडी हैं एक मासूम बालिका
रोटी की गुहार लगाती
मकान मालकिन क्रोध भरी
ऑखे दिखाती
फटकारती हुई
भगाती हुई
मैं गुजरता हूँ रोकती मुझे
भाई साहब सुनो
आपके बेटो की तीनो छोटी बच्चियो को
भेजना अभी
नव रात्रि का उद्धापन हैं
उपवास खोलना हैं
सभी बुकिंग हैं लड़कियाँ आज
मैं स्वीकृति मे सिर हिलाता हूँ
देखता इस बच्ची की तरफ
जिसको फटकार मिली हैं
रोटी के टुकड़े के लिए
एक लम्बी श्वास निकलती हैं
स्वतः बेलगाम
ओर वेदना का दरिया
हिलोरे लेता सा
उफनता हैं
यह उफान गहराये
कि पहले इसके
समाज ओर शासन को
संभलना होगा ।
छगन लाल गर्ग।