चलो ना अब अपने घर
ठीक है मिल लिए
देखा तुम्हारे मा बाप को
अब चले अपने घर
ठीक रखा होगा
कंहा मना करती
बूढे बूढिया है दोनो चालाक
देखो बिटिया का
प्रवेश मत दिलवाना यहा
फिर आना पडेगा
बेठी के लिए
इस नरक
चलो चले काफी है
एक रात का विश्राम
ज्यादा इनको मुह लगाना
नही रहेगा ठीक
सुनता हू बेटे की आवाज
चीढता सा
मैंने तो पहले ही कहा था
खामखाह खर्चा हुआ तुम्हारी वजह
क्या जरूरत थी यहा आने की
मोबाईल से
खबर लेते है काफी है
पिता श्री की तबीयत
अनदेखा किया
निश्वास लिए बहू का स्वर
अब दुनिया दारी
बूढे बूढिया जीने तक
झंझट झेलना
हमारी किस्मत है
ओर भीतरी निश्वास छूटता
मेरे करूणानिधि
हम बूढो पर
कब होगी तेरी कृपा ।
छगनलाल गर्ग ।
ठीक है मिल लिए
देखा तुम्हारे मा बाप को
अब चले अपने घर
ठीक रखा होगा
कंहा मना करती
बूढे बूढिया है दोनो चालाक
देखो बिटिया का
प्रवेश मत दिलवाना यहा
फिर आना पडेगा
बेठी के लिए
इस नरक
चलो चले काफी है
एक रात का विश्राम
ज्यादा इनको मुह लगाना
नही रहेगा ठीक
सुनता हू बेटे की आवाज
चीढता सा
मैंने तो पहले ही कहा था
खामखाह खर्चा हुआ तुम्हारी वजह
क्या जरूरत थी यहा आने की
मोबाईल से
खबर लेते है काफी है
पिता श्री की तबीयत
अनदेखा किया
निश्वास लिए बहू का स्वर
अब दुनिया दारी
बूढे बूढिया जीने तक
झंझट झेलना
हमारी किस्मत है
ओर भीतरी निश्वास छूटता
मेरे करूणानिधि
हम बूढो पर
कब होगी तेरी कृपा ।
छगनलाल गर्ग ।