बहुत याद आती
धीरे धीरे अहमियत समझता
कितने भीतर से अर्पित
नहीं पाता गहराई
उतरता भीतर मात्र सुरभि पाता
तुम्हारी विरान निशब्द अभिव्यक्ति
अति लघुता भरी
जिन्दगी टोह ले सचेत रहे तुम
अल्पावधि मे कर गये
जो कर्तव्य
दीर्घ वय मे नहीं हो पाते
ममत्व का दरिया
बिना तुम्हारे सुखता नहीं
भरता रहता नेह नीर बन नयनों का
कहां रहते खाली आँसुओं में
तेरते रहते नैना
ओर तुम उभरते रहते
सांत्वना देते
समझाते बुझाते
शायद परोक्ष नहीं आता समझ
कहा तुम्हारा
अब सब समझने लगा
अव्यक्त तुम जो कहते मौन रहते
नहीं जा पाते स्मृति पथ से
आते रहो निरंतर
मेरे होने तक
विराट परमेश्वर की इच्छा तक
फिर कहां अलग हम
एक अस्तित्व एक राग एक तत्व
फासले मेरे तुम्हारे नहीं बनाये
यह सब
रहस्यमय अलौकिक जाने
करो इंतजार
वक्त की पुकार सुनने तक ।
छगन लाल गर्ग ।
धीरे धीरे अहमियत समझता
कितने भीतर से अर्पित
नहीं पाता गहराई
उतरता भीतर मात्र सुरभि पाता
तुम्हारी विरान निशब्द अभिव्यक्ति
अति लघुता भरी
जिन्दगी टोह ले सचेत रहे तुम
अल्पावधि मे कर गये
जो कर्तव्य
दीर्घ वय मे नहीं हो पाते
ममत्व का दरिया
बिना तुम्हारे सुखता नहीं
भरता रहता नेह नीर बन नयनों का
कहां रहते खाली आँसुओं में
तेरते रहते नैना
ओर तुम उभरते रहते
सांत्वना देते
समझाते बुझाते
शायद परोक्ष नहीं आता समझ
कहा तुम्हारा
अब सब समझने लगा
अव्यक्त तुम जो कहते मौन रहते
नहीं जा पाते स्मृति पथ से
आते रहो निरंतर
मेरे होने तक
विराट परमेश्वर की इच्छा तक
फिर कहां अलग हम
एक अस्तित्व एक राग एक तत्व
फासले मेरे तुम्हारे नहीं बनाये
यह सब
रहस्यमय अलौकिक जाने
करो इंतजार
वक्त की पुकार सुनने तक ।
छगन लाल गर्ग ।