Saturday, June 4, 2016

श्वेत वस्त्र

साफ सुथरा शरीर 
धवल धारित श्वेत वस्त्र 
सौरभ स्व यशस्वी यौवन काल
त्रिगुणोतम मानव 
सृष्टि रचना का श्रेष्ठतम
अब मंजता हुआ 
अपने स्वाभाविक रस से भिन्न 
नहीं आपूर्ति संतुष्ट ईश्वरीय 
स्वविवेक का अहं
विज्ञान संश्लेषण क्रियाओं में
स्वंभू बना
नहीं आस्थामय राग जड बना
मूर्त अनुभूतिओं का साक्षी
न्याय की तरह
सुखता जाता भीतर 
गहन शुष्कता की आग को
देता जाता हवा
विद्धुत पंखे की तरह
तलाश करता उसी में
शीतल हवा की जींवंत नवल मधु स्मित
आँकाक्षा आनंद भरी
अनंत खोज जारी निरंतर 
राह का अन्वेषण भूला 
गलत गलियारों में 
अणुओं के अस्तित्व में खोया
आज प्रबुद्ध चेतना शिरोमणि 
भावी नहीं अब रोशन
कि दिखाई दे अग्रिम राह
छगन लाल गर्ग