आवाज वहीं हैं
पहली बार की नहीं
कई दफा झकझोरा हैं मुझे
दौडा दरवाजे देखता हूँ
हाँ यही तो हैं
पर इस बार अपंग तन
हाथ साइकिल सवार हैं
कहां पायी
जवाब पर झूझलाया
रक्षा बंधन अफसर बेटा आया था
बहू के पापा ने सिफारिश की थी
बेटे ने दिलवा दी
अब बाबूजी ठीक हैं
दयावानो से पेट दोनों का
भर जाता हैं
हृदय सुन मेरे
क्यों सुनते नहीं
रक्त संबंधी रिश्तों के हृदय
ऑखे गिली हुई
आवाज देता हूँ
चाय रोटी देना
यूँ ही मत जाने देना।
पहली बार की नहीं
कई दफा झकझोरा हैं मुझे
दौडा दरवाजे देखता हूँ
हाँ यही तो हैं
पर इस बार अपंग तन
हाथ साइकिल सवार हैं
कहां पायी
जवाब पर झूझलाया
रक्षा बंधन अफसर बेटा आया था
बहू के पापा ने सिफारिश की थी
बेटे ने दिलवा दी
अब बाबूजी ठीक हैं
दयावानो से पेट दोनों का
भर जाता हैं
हृदय सुन मेरे
क्यों सुनते नहीं
रक्त संबंधी रिश्तों के हृदय
ऑखे गिली हुई
आवाज देता हूँ
चाय रोटी देना
यूँ ही मत जाने देना।