चल पथिक कहीं राह खोजे
आज कल का माप खोजे
भावना का राज खोजे
नित नया संसार खोजे
थक मत राह मिली कहां हैं
ऊठ फिर चले राह कहीं हैं
ठहरे जीवन कसक घनी हैं
उन्माद नया ले राह बनी हैं
हारे तो विलिन होते तुम
जीते पाते विस्तार उतम
वीणा तार रहे विषम सम
टूटे मिल न पाये सरगम
राग अधूरा गीत अधूरा
राह बिना काल का घेरा
रोशनी बिना का सवेरा
चल काटे जंगल का फेरा
पथ मिले न मिले चल पथिक मेरे
उबड खाबड वन को राह से भरे
खो ले तेरा मेरा अर्पित आज करे
रहे चलेगे ओरो के हित काम करे
हृदय कसक से फिर जीवन भरे
जिसे हम कहते हैं संताप जीवन
रहता उसी मे हैं सब सार जीवन
ईश्वर का वहीं मानव को वरदान
भूले हम सुख सार भरे हैं जीवन ।
आज कल का माप खोजे
भावना का राज खोजे
नित नया संसार खोजे
थक मत राह मिली कहां हैं
ऊठ फिर चले राह कहीं हैं
ठहरे जीवन कसक घनी हैं
उन्माद नया ले राह बनी हैं
हारे तो विलिन होते तुम
जीते पाते विस्तार उतम
वीणा तार रहे विषम सम
टूटे मिल न पाये सरगम
राग अधूरा गीत अधूरा
राह बिना काल का घेरा
रोशनी बिना का सवेरा
चल काटे जंगल का फेरा
पथ मिले न मिले चल पथिक मेरे
उबड खाबड वन को राह से भरे
खो ले तेरा मेरा अर्पित आज करे
रहे चलेगे ओरो के हित काम करे
हृदय कसक से फिर जीवन भरे
जिसे हम कहते हैं संताप जीवन
रहता उसी मे हैं सब सार जीवन
ईश्वर का वहीं मानव को वरदान
भूले हम सुख सार भरे हैं जीवन ।