बस करो ना
हर बार मेरा बखान
अब रात भी क्या
सौन्दर्य भरती हैं
प्रेम देती हैं
कैसे हो तुम
मैं ही मिली क्या तुम्हें
अभागे
चाँदनी रही कहां
कि मेरे ऑचल के मोती
तुम्हारे जमीन की रोशनी से
रोशन हैं
कि शीतल हैं
चकाचौंध दुनिया तुम्हारी
कहीं बेहतर
लुभाती तुम्हें
मेरा सौन्दर्य अब
बेकारो का बकवास
रहा हैं
सच कहो
किताबी तारिफ से जुदा
कब निहारा तुमने मुझे
कि तुम्हारे प्राणों की रश्मिया
मेरा तम चिरती सी
पहुँची हो मेरे प्राणो तक
असली सौन्दर्य
कहां देखते तुम
तुम्हारे विशाल जग की
तमाम कालिमा समेटे
जीती मे
कि तुम नयी उर्जा लिए
फिर फिर
चेतना लिए जी सको
एक तुम हो
हर बार की तरह
बनावट लिपटी
अंलकारिक तारिफ किए जाते हो
भर गया हैं मन अब
बस करो ना।
छगन लाल गर्ग।
हर बार मेरा बखान
अब रात भी क्या
सौन्दर्य भरती हैं
प्रेम देती हैं
कैसे हो तुम
मैं ही मिली क्या तुम्हें
अभागे
चाँदनी रही कहां
कि मेरे ऑचल के मोती
तुम्हारे जमीन की रोशनी से
रोशन हैं
कि शीतल हैं
चकाचौंध दुनिया तुम्हारी
कहीं बेहतर
लुभाती तुम्हें
मेरा सौन्दर्य अब
बेकारो का बकवास
रहा हैं
सच कहो
किताबी तारिफ से जुदा
कब निहारा तुमने मुझे
कि तुम्हारे प्राणों की रश्मिया
मेरा तम चिरती सी
पहुँची हो मेरे प्राणो तक
असली सौन्दर्य
कहां देखते तुम
तुम्हारे विशाल जग की
तमाम कालिमा समेटे
जीती मे
कि तुम नयी उर्जा लिए
फिर फिर
चेतना लिए जी सको
एक तुम हो
हर बार की तरह
बनावट लिपटी
अंलकारिक तारिफ किए जाते हो
भर गया हैं मन अब
बस करो ना।
छगन लाल गर्ग।