Monday, June 13, 2016

उलझन

अब क्या हो 
इस उलझन का
उपाय करें। तो क्या 
नित नये रूप लिए घेरती मुझे 
ओर मैं 
कसमसाता जीता जाता हूँ 
बेशर्मी से
हर निगाह अटकती ओर मानो 
पूछती
यह तो वहीं हैं
जो रिटायर हुआ 
अफसर हैं 
शर्म आती नहीं 
इस उम्र मे
प्राइवेट फैक्टरी का हिसाब 
देखता हैं 
कुछ पैसो के लिए
पैन्सन भी लेता होगा
अब किन किन को बताऊ
कि पैठ वाले बाबू ने
फर्जी बिल बना
हस्ताक्षर करवाये थे
मामला अटका हैं 
इन्कवारी चलती हैं 
हर महिने कोर्ट पैशी 
लगता ऐसा
पैन्सन मिले मिले 
एक दिन 
मौत पैन्सन से पहले 
मिलेगी
अब विवशता कहीं से
लानी थोडे ही हैं
छगन लाल गर्ग।