जब भी यादों के घने छाये घेरे हैं मुझे।
आरजू खामोशी से दिल सताती मुझे ।
तेरी यादों का मेला रूलाता जायेमुझे।
तन्हाई खुदा जिन्दगानी क्यों दी मुझे।
तेरी खामोशी सहू कैसे ।
तेरा झरना बहे सुनू कैसे ।
जालिम जख्म भरू कैसे ।
हंसी तंरग दे तू महकू कैसे ।
छगनलाल गर्ग।
आरजू खामोशी से दिल सताती मुझे ।
तेरी यादों का मेला रूलाता जायेमुझे।
तन्हाई खुदा जिन्दगानी क्यों दी मुझे।
तेरी खामोशी सहू कैसे ।
तेरा झरना बहे सुनू कैसे ।
जालिम जख्म भरू कैसे ।
हंसी तंरग दे तू महकू कैसे ।
छगनलाल गर्ग।