आज फिर लाया हूँ
गहन घेरा विकट संघर्ष सार लाया हूँ
जलन वेदना सम्मिश्रण बना नवहार लाया हूँ
अकथ मर्म मन जलो का निस्सार बना जीवन भी लाया हूँ
मोल नहीं बेमोल देने मित्र मेरे लाया हूँ
बेझिझक नहीं झिझकते मन ले आया हूँ
भार तो घना पर उठाकर अकेले लाया हूँ
मिलो मुझे सहो मुझे दुख ओरो का लाया हूँ
थोड़ा तुम थोड़ा ओर बाँटने अपनो मे आया हूँ
ले लो न मित्र बेदाम देता मानव बनाने आया हूँ
हताश जीवन मे खुशियों का पैगाम लाया हूँ
आज फिर लाया हूँ ।
छगनलाल गर्ग।
गहन घेरा विकट संघर्ष सार लाया हूँ
जलन वेदना सम्मिश्रण बना नवहार लाया हूँ
अकथ मर्म मन जलो का निस्सार बना जीवन भी लाया हूँ
मोल नहीं बेमोल देने मित्र मेरे लाया हूँ
बेझिझक नहीं झिझकते मन ले आया हूँ
भार तो घना पर उठाकर अकेले लाया हूँ
मिलो मुझे सहो मुझे दुख ओरो का लाया हूँ
थोड़ा तुम थोड़ा ओर बाँटने अपनो मे आया हूँ
ले लो न मित्र बेदाम देता मानव बनाने आया हूँ
हताश जीवन मे खुशियों का पैगाम लाया हूँ
आज फिर लाया हूँ ।
छगनलाल गर्ग।