नंगे हैं पाँव
नहीं खरीद पाता
नन्हे बालकों की जूतिया
संकरी गंदी गली का आदमी
तलाशता हूँ नित उठते ही शोषक
जो मेरे रक्त को चूसता रहे
फक्त देता रहे दो वक्त की रोटिया
कि बढता रहे रक्त
उसके निमित्त
जाडे का आश्वासन पाता हूँ
गली के नेता से
कि देती हैं सरकार
मदद की राशि
झोपड़ियों को पक्का बनना
आंदोलन उभरा हैं
ताकता विगत की ओर
वक्त के धुधलके मे दबे दबे
सारे गरीबी उन्मूलन आन्दोलन
चटकारे लेते
चिढाते हैं मुझे
आज भी वहीं मैं वहीं मेरी झोपड़ी
रंगीन सपनों के चमकते कान्च के टुकड़े
जन हित की प्राथमिकता मे
मेरी गंदी गली मे फैके जा रहे हैं
नंगे पाँव खेलते
मेरे बच्चे
टुकड़े नुकिले पर रंगिनी का आकर्षण
दौडते चाहते बच्चों के पेरो को
जख्मी करते हैं
गिरती रक्त बूँदो का दृश्य
दिल चिरता जाता
देखो मेरी तरफ
मैं भी तुम्हारी ही मानवता
का तिरस्कृत अंग हूँ
याचना के स्वर शायद नहीं भाते तुम्हें
मौन मुखर होना
तुम्हारी रंगिनियो विसर्जन हैं ।
छगन लाल गर्ग।
नहीं खरीद पाता
नन्हे बालकों की जूतिया
संकरी गंदी गली का आदमी
तलाशता हूँ नित उठते ही शोषक
जो मेरे रक्त को चूसता रहे
फक्त देता रहे दो वक्त की रोटिया
कि बढता रहे रक्त
उसके निमित्त
जाडे का आश्वासन पाता हूँ
गली के नेता से
कि देती हैं सरकार
मदद की राशि
झोपड़ियों को पक्का बनना
आंदोलन उभरा हैं
ताकता विगत की ओर
वक्त के धुधलके मे दबे दबे
सारे गरीबी उन्मूलन आन्दोलन
चटकारे लेते
चिढाते हैं मुझे
आज भी वहीं मैं वहीं मेरी झोपड़ी
रंगीन सपनों के चमकते कान्च के टुकड़े
जन हित की प्राथमिकता मे
मेरी गंदी गली मे फैके जा रहे हैं
नंगे पाँव खेलते
मेरे बच्चे
टुकड़े नुकिले पर रंगिनी का आकर्षण
दौडते चाहते बच्चों के पेरो को
जख्मी करते हैं
गिरती रक्त बूँदो का दृश्य
दिल चिरता जाता
देखो मेरी तरफ
मैं भी तुम्हारी ही मानवता
का तिरस्कृत अंग हूँ
याचना के स्वर शायद नहीं भाते तुम्हें
मौन मुखर होना
तुम्हारी रंगिनियो विसर्जन हैं ।
छगन लाल गर्ग।