Saturday, June 11, 2016

नंगे हैं पाँव

नंगे हैं पाँव 
नहीं खरीद पाता
नन्हे बालकों की जूतिया
संकरी गंदी गली का आदमी 
तलाशता हूँ नित उठते ही शोषक 
जो मेरे रक्त को चूसता रहे
फक्त देता रहे दो वक्त की रोटिया
कि बढता रहे रक्त 
उसके निमित्त 
जाडे का आश्वासन पाता हूँ 
गली के नेता से
कि देती हैं सरकार 
मदद की राशि
झोपड़ियों को पक्का बनना 
आंदोलन उभरा हैं 
ताकता विगत की ओर
वक्त के धुधलके मे दबे दबे
सारे गरीबी उन्मूलन आन्दोलन
चटकारे लेते
चिढाते हैं मुझे 
आज भी वहीं मैं वहीं मेरी झोपड़ी 
रंगीन सपनों के चमकते कान्च के टुकड़े 
जन हित की प्राथमिकता मे
मेरी गंदी गली मे फैके जा रहे हैं 
नंगे पाँव खेलते 
मेरे बच्चे 
टुकड़े नुकिले पर रंगिनी का आकर्षण
दौडते चाहते बच्चों के पेरो को 
जख्मी करते हैं 
गिरती रक्त बूँदो का दृश्य 
दिल चिरता जाता
देखो मेरी तरफ
मैं भी तुम्हारी ही मानवता 
का तिरस्कृत अंग हूँ 
याचना के स्वर शायद नहीं भाते तुम्हें 
मौन मुखर होना
तुम्हारी रंगिनियो विसर्जन हैं
छगन लाल गर्ग।