रहते नहीं तुम
चेतन मे
बार बार बुलाता तुम्हें
आओ अब
विरानियो के भंवर
क्यों रास हैं तुम्हें
मानते कहां हो
फसे फसे करते जाते
जीवन का माप तोल
क्या होगा यह
अचेतन की यह दशा
तुम्हारी जानी पहचानी
हैं कहां
जो करते तुम
क्या होश मे हो
बेहोश दशा जीते हो
भाई मेरे
यह उलझन नये युग का
सभ्य तोहफा
कि जीते रहो
बेहोश जिन्दगी देखा दैखी
जिसमें तुम्हारा
अस्तित्व कहीं उभरता नहीं
तुम्हारा किया कराया
कहां हैं तुम्हारा
बस हो जाता हैं
अंसम्भित पाते हो
परिणाम पाते हो
यह दशा आज की
तुम्हारी कहां मित्र
मेरी भी हैं
स्वतः जीना होता हैं
बेसमझी का यह जीवन
चलता रहता हैं
लौटो मित्र
भीतर अपने
चेतन मे रहो
शायद जिन्दगी का
अर्थ पा सको।
छगन लाल गर्ग।
चेतन मे
बार बार बुलाता तुम्हें
आओ अब
विरानियो के भंवर
क्यों रास हैं तुम्हें
मानते कहां हो
फसे फसे करते जाते
जीवन का माप तोल
क्या होगा यह
अचेतन की यह दशा
तुम्हारी जानी पहचानी
हैं कहां
जो करते तुम
क्या होश मे हो
बेहोश दशा जीते हो
भाई मेरे
यह उलझन नये युग का
सभ्य तोहफा
कि जीते रहो
बेहोश जिन्दगी देखा दैखी
जिसमें तुम्हारा
अस्तित्व कहीं उभरता नहीं
तुम्हारा किया कराया
कहां हैं तुम्हारा
बस हो जाता हैं
अंसम्भित पाते हो
परिणाम पाते हो
यह दशा आज की
तुम्हारी कहां मित्र
मेरी भी हैं
स्वतः जीना होता हैं
बेसमझी का यह जीवन
चलता रहता हैं
लौटो मित्र
भीतर अपने
चेतन मे रहो
शायद जिन्दगी का
अर्थ पा सको।
छगन लाल गर्ग।