मुश्किल हैं अर्थ देना
जीवन के प्रगाढ सत्यो को
खप जाते हैं जीवन
अर्थ ढूँढते
यह रहस्यमय ब्रह्माण्ड
नापते हैं हम
सामर्थ्य हीन विवेक से
जो खुद का सृजित भी नहीं
पाया पुरखो के सृजन से
उसी प्रज्ञा चम्मच को
पकडे हैं अपनी किए
जी जान से
दोनों हाथों मजबूती से
कि छिन ना ले कोई ओर
नित नापते जा रहे
विशाल रहस्यो भरा
अथाह ज्ञान का रहस्यमय
सागर
कैसे होगा यह
उपाय मात्र यह
तरीके बदलने होगे
कुछ अपना जोडना होगा
चम्मच फैक कर
अंतर के विशाल सागर
बेबूझी से
कूदना होगा
मोती रहस्य वहीं हैं
तलाश बाकी हैं ।
छगन लाल गर्ग।
जीवन के प्रगाढ सत्यो को
खप जाते हैं जीवन
अर्थ ढूँढते
यह रहस्यमय ब्रह्माण्ड
नापते हैं हम
सामर्थ्य हीन विवेक से
जो खुद का सृजित भी नहीं
पाया पुरखो के सृजन से
उसी प्रज्ञा चम्मच को
पकडे हैं अपनी किए
जी जान से
दोनों हाथों मजबूती से
कि छिन ना ले कोई ओर
नित नापते जा रहे
विशाल रहस्यो भरा
अथाह ज्ञान का रहस्यमय
सागर
कैसे होगा यह
उपाय मात्र यह
तरीके बदलने होगे
कुछ अपना जोडना होगा
चम्मच फैक कर
अंतर के विशाल सागर
बेबूझी से
कूदना होगा
मोती रहस्य वहीं हैं
तलाश बाकी हैं ।
छगन लाल गर्ग।