अतिशय स्नेह रिश्तों का
देता रहा आकांक्षाऐ अज्ञात
समय का सच
पहचानने के बाद
अब नहीं रहा विश्वास
परिचय या पहचान का
या कि रिश्ते की
नाजुक गहराई
नहीं अब केवल
शब्द रह गये
करते रहो शब्द देकर
संबंधो की पुकार
देते रहो हवाला
निकटस्थ रक्त संबंधों का
नहीं स्वीकार्य स्वार्थ रहते
अब नाते रिश्ते निर्भर
आपकी सामर्थ्य पर
कि कितना दे पाते हो
बिना वसूली का तभी
कायम रह सकोगे
रिश्तों की जंजीर
लगातार
अपना समस्त गंवाकर
ओर फिर
नहीं काबलियत की निभा सको
इस दौर मे
केवल पदार्थों से
निमित्त रिश्ते ही
युग की पहचान
अन्यथा के रिश्तों का सामर्थ्य
केवल दौहरान हैं
फैमिन मे मजदूरों की हाजरी की तरह
या कि मुसीबत में
समर्थो की खुशहाली पर
निश्वास की तरह
अति स्नेहिल रिश्तों का सच
किसी एक पक्ष की
छाती पर खडा कटु सत्य हैं ।
छगन लाल गर्ग ।
देता रहा आकांक्षाऐ अज्ञात
समय का सच
पहचानने के बाद
अब नहीं रहा विश्वास
परिचय या पहचान का
या कि रिश्ते की
नाजुक गहराई
नहीं अब केवल
शब्द रह गये
करते रहो शब्द देकर
संबंधो की पुकार
देते रहो हवाला
निकटस्थ रक्त संबंधों का
नहीं स्वीकार्य स्वार्थ रहते
अब नाते रिश्ते निर्भर
आपकी सामर्थ्य पर
कि कितना दे पाते हो
बिना वसूली का तभी
कायम रह सकोगे
रिश्तों की जंजीर
लगातार
अपना समस्त गंवाकर
ओर फिर
नहीं काबलियत की निभा सको
इस दौर मे
केवल पदार्थों से
निमित्त रिश्ते ही
युग की पहचान
अन्यथा के रिश्तों का सामर्थ्य
केवल दौहरान हैं
फैमिन मे मजदूरों की हाजरी की तरह
या कि मुसीबत में
समर्थो की खुशहाली पर
निश्वास की तरह
अति स्नेहिल रिश्तों का सच
किसी एक पक्ष की
छाती पर खडा कटु सत्य हैं ।
छगन लाल गर्ग ।