अनजान अहसान
किसी समर्थ व्यक्ति का
निर्बल के हित
अज्ञात रहते पाया मैंने
ओर देखा यह भी
कि हर कहीं निर्बल
गुणगान करता
जिन्दगी भर
पछताते भी देखा
कि हाय रे जीवन
अज्ञात धर्मात्मा के
दीदार मिले
यह दर्द विरल हुआ
सालता जीवन भर
नहीं विस्मृत होता भावों मे
अनजाना खिंचाव
समर्पित आँकाक्षा लिए
रहते अवसर की प्रतीक्षा मे
उतार पाये अहसान का ऋण
संस्कारों का विशुद्ध सार
अब बनता जाता श्वासों का भार
अहसान बदल चुका अहसास
नवीन संस्कारों का
सभ्य शुद्धिकरण
अब जीवन शैली ने बदली
अपनी करवट
अब अहसान
होता अधिक पहले से
पर समूल्य
आगे की गरज व
महता कार्य पर
करता निर्भर किमती अहसान
अब उऋण होने मे
नहीं तडपना होता जीवन रहते
हाँ किमत अहसान भरपाई में
गुजारने बाध्य होते
कष्ट भरे दिन
बच्चों के जरूरी सपने
ओर रोते बिलखते सैकड़ों योग्य
व्यक्तियों के सुनहरे सपने
आज का अहसान
लोगों की बलि पर फलीभूत होता
मुस्कराता रंगीन हंसी ।
छगन लाल गर्ग ।
किसी समर्थ व्यक्ति का
निर्बल के हित
अज्ञात रहते पाया मैंने
ओर देखा यह भी
कि हर कहीं निर्बल
गुणगान करता
जिन्दगी भर
पछताते भी देखा
कि हाय रे जीवन
अज्ञात धर्मात्मा के
दीदार मिले
यह दर्द विरल हुआ
सालता जीवन भर
नहीं विस्मृत होता भावों मे
अनजाना खिंचाव
समर्पित आँकाक्षा लिए
रहते अवसर की प्रतीक्षा मे
उतार पाये अहसान का ऋण
संस्कारों का विशुद्ध सार
अब बनता जाता श्वासों का भार
अहसान बदल चुका अहसास
नवीन संस्कारों का
सभ्य शुद्धिकरण
अब जीवन शैली ने बदली
अपनी करवट
अब अहसान
होता अधिक पहले से
पर समूल्य
आगे की गरज व
महता कार्य पर
करता निर्भर किमती अहसान
अब उऋण होने मे
नहीं तडपना होता जीवन रहते
हाँ किमत अहसान भरपाई में
गुजारने बाध्य होते
कष्ट भरे दिन
बच्चों के जरूरी सपने
ओर रोते बिलखते सैकड़ों योग्य
व्यक्तियों के सुनहरे सपने
आज का अहसान
लोगों की बलि पर फलीभूत होता
मुस्कराता रंगीन हंसी ।
छगन लाल गर्ग ।