नव चेतन क्षण
अब बस भी करो
रीता हूँ प्रतिपल
बाती बनकर
यह प्राण जलन
मिटती ही नही
तुम आ जाते हो
व्यथा भार लिए
संसर्ग घनत्व
डूबा रे चित प्राण
पवन घूले
अभिसार हुए
बस जाते हृदय
प्राण श्वास बने
विरल तंरग की
ध्वनि विरह
कसक स्वर रूंघे मेरे
नहीं वाणी का
सहयोग प्रिये
अंतर्वेदना कसक
किस भांति कहूँ
अदृश्य तंरगो
आऔ तो
मिलो न मुझमे
कुछ आस बंधे
नहीं निशां नीर के
बहता विकल
तुम रश्मि जाल
छितराओ तो
लो घोल बना दो
विरह मेरा
कुछ सार समय
फिर पा जाये
अब चेतन चाहे
मिलन अचेतन
राग बने तुम
आऔ तो
नव जीवनकी
श्वास बनकर
मेरे अलौकिक
आऔ तो।
छगन लाल गर्ग।
अब बस भी करो
रीता हूँ प्रतिपल
बाती बनकर
यह प्राण जलन
मिटती ही नही
तुम आ जाते हो
व्यथा भार लिए
संसर्ग घनत्व
डूबा रे चित प्राण
पवन घूले
अभिसार हुए
बस जाते हृदय
प्राण श्वास बने
विरल तंरग की
ध्वनि विरह
कसक स्वर रूंघे मेरे
नहीं वाणी का
सहयोग प्रिये
अंतर्वेदना कसक
किस भांति कहूँ
अदृश्य तंरगो
आऔ तो
मिलो न मुझमे
कुछ आस बंधे
नहीं निशां नीर के
बहता विकल
तुम रश्मि जाल
छितराओ तो
लो घोल बना दो
विरह मेरा
कुछ सार समय
फिर पा जाये
अब चेतन चाहे
मिलन अचेतन
राग बने तुम
आऔ तो
नव जीवनकी
श्वास बनकर
मेरे अलौकिक
आऔ तो।
छगन लाल गर्ग।