Saturday, June 11, 2016

कपाट

खोलता नही 
संभावनाओ के कपाट
बंद रखे जीता हूँ 
ठावस भरी जिन्दगी 
निश्चय हुआ जाता नित
जिन्दगी का यथार्थ 
तब्दीली की संभावनाएँ 
भौथरा गयी हैं वक्त के हाथों 
ओर कर्म बनता जाता
असफलताओ का आगार
कि संभाले नहीं संभलती
पराजय की कसक
मूल्य ओर मतलबपरस्ती का संघर्ष 
झेलता थका हारा
तलाशता जाता मानव का असली चेहरा 
खोज गहरी पाती जाती 
शब्दों के छलावे
हैरान परेशान सा तोलता हूँ 
जिन्दगी तेरी असलियत 
कि पा जाऊ जाऊ फरेबो के अंधेरे मे
कहीं छिपी रोशनी की रश्मिओ को समेटे
बैठी हो अपनो का इन्तजार करते 
तलाशता दुविधा जीता चेतन हूँ मैं 
रूपको से
अभिनय का हुनर 
छलावे उतरता पाता हूँ 
शब्दों का चमत्कार 
बहता आशक्ति प्रवाह लिए
रखे जाते हैं प्रवाहित नीर मे
आस्थाओ के दीप
कृत्रिम विद्युतिय रोशनी के
जलते जाते 
बिना खुद को जलाये
खुद असल हुए बिना 
होती जाती हैं भ्रान्ति
चेतन हूँ मैं 
भीतरी दीप जलने का अहसास 
पाता जीता हूँ जिन्दगी तुझे 
छल अनुभव जीता हुआ 
ठावस जीता हूँ जिन्दगी तुझे 
चमक देते है शब्द 
शब्दों का अर्थ जानता हूँ 
बंद रखे जीता हूँ 
संभावनाओ के कपाट।