बीती रात पर तुम नहीं आये
अलक गंध जी भर तरसाये
प्रियतम प्राण विकल तडपाये
बीती रात पर तुम नहीं आये।
अधरो मे राग रस छलकाये
अमंद मलयज सा नेह बरसाये
वियोग राग स्वर हृदय सुनाये
बीती रात पर तुम नहीं आये ।
भोर हुई हैं प्रियतम पंखी गाये
कोमल किसलय पवन लहराये
लतिकाये मीठा नेह नीर बहाये
नवल रस भरी हैं गागर छलकाये
बीती रात पर प्रियतम नहीं आये।
छगन लाल गर्ग।
अलक गंध जी भर तरसाये
प्रियतम प्राण विकल तडपाये
बीती रात पर तुम नहीं आये।
अधरो मे राग रस छलकाये
अमंद मलयज सा नेह बरसाये
वियोग राग स्वर हृदय सुनाये
बीती रात पर तुम नहीं आये ।
भोर हुई हैं प्रियतम पंखी गाये
कोमल किसलय पवन लहराये
लतिकाये मीठा नेह नीर बहाये
नवल रस भरी हैं गागर छलकाये
बीती रात पर प्रियतम नहीं आये।
छगन लाल गर्ग।