Saturday, June 11, 2016

बीती रात

बीती रात पर तुम नहीं आये
अलक गंध जी भर तरसाये
प्रियतम प्राण विकल तडपाये
बीती रात पर तुम नहीं आये।
अधरो मे राग रस छलकाये
अमंद मलयज सा नेह बरसाये
वियोग राग स्वर हृदय सुनाये
बीती रात पर तुम नहीं आये
भोर हुई हैं प्रियतम पंखी गाये
कोमल किसलय पवन लहराये
लतिकाये मीठा नेह नीर बहाये
नवल रस भरी हैं गागर छलकाये
बीती रात पर प्रियतम नहीं आये।
छगन लाल गर्ग।