Monday, June 13, 2016

यह आसमा

यह आसमा क्या मेरे लिए
जहाँ अनन्त खुलापन स्वीकारता मुझे 
आधारहीन ऊँचाई का करिश्मा बना हूँ मैं
बिना धरातल का पंखी हुआ विचरता मैं 
ना कोई बाधा ना ही कोई प्रतिस्पर्धा 
केवल मैं और मैं 
आशीर्वाद पाया हूँ शास्त्रीय परमात्मा से
यह तुम्हारे परमात्मा से ऊँची हस्ती हैं 
जिसे साबित करने की आवश्यकता नहीं 
खुद उसी की वाणी 
चमत्कारी शास्त्र बने हैं 
जिसमें अस्तित्व तुम्हारा हेय अधम दर्जे का
केवल सेवा निमित्त हमारी 
यही तुम्हारी जिन्दगी ओर जिन्दा रहने का 
असली राज हैं 
देखो निरखो सराहो दूरी से
हम आकाशिय जीव धरातलीय जीवो से
अनन्त ऊँचे 
बराबरी का हक माँगते शर्म करो
आरक्षण की तुम्हें नहीं हमें जरूरत हैं 
क्यों कि हम आकाशिय स्वर्ग हैं 
तुम सभी शास्त्र ओर धर्म विरोधियो को
ओकात बतानी होगी
आखिर हम आकाशिय ठहरे
छगन लाल गर्ग।