Thursday, June 9, 2016

रास्ता

जीवन की तरह
हर मंजिल जाता रास्ता
मोड भरा
नहीं सीधापन
सशक्तो की मंजिलें
बाधक बनी सीधेपन के
राह का आकार ही
अपनाने की मजबूरी
झेलती जिंदगी हमारी
विराट आकार के धनी
झांकते मंजिलों से
लेते रहते जायजा
हमारे कदमों का
जरा चूक लडखडायें कदमों की
देती हैं हौंसला उन्हें
धकेले जाने का
घने गर्त 
कि ना पा सके फिर हौसला
चलने का
ओर मोड भरी राहें भी
ले सके शक्ल
विराट मंजिलों की
हर रास्ता सामान्य जन का
रोकने पर आमदा हैं
सशक्त हैशियत
लगता हैं पगडंडियाभीं
अब आम जन से खिचकती
विशिष्ट होने पर
आमदा हैं
विस्तार पाते युग का
अविष्ट बना 
सामान्य जन
जीता जाता दुत्कारी 
जिंदगी
अंतराल गहराता सत्य
खडा हैं अंतिम कगार
लगता
संक्रमण युग नव चुनौति
लिए देता हमें
निमंत्रण।
छगन लाल गर्ग।