Friday, June 3, 2016

दांवपेंच

खेलना जानते तुम
दांवपेंच 
मंजे हुए खिलाडी हो
भाई वाह बडे हुनरमंद 
हर बार के विजेता 
नही कह सकता 
तुम्हें कोई जज्बाती 
यह अलग बात कि 
तुम कहते हो
अपने बारे मे यह शब्द 
बहुत पुराना 
यह शब्द सभ्यता विरोधी 
बीते जमाने के साथ यह
तोड चुका दम 
शब्द 
पर तुम्हारी कामयाबी के बाद 
हर बार तुम करते याद 
बताते खुद को जज्बाती 
चलो अच्छा रहेगा 
आवरण देगा यह शब्द 
तुम्हारी करतूतों को
तुम्हारी सफलता की 
अथक कोशिश को
फायदा करेगा 
राह देगा हर अथक कोशिश को
जो तुम्हारी तरह के है खिलाडी 
उनमें संजीवनी भरेगा
जैसे भरता है तुम्हारे भीतर 
हम विवश हैं
हम नही जानते खेलना 
उखड जाती है श्वासें 
हर बार हमारी 
ओर
हारते बाजी जीवन की 
हर बार
अनाडी ठहरे 
क्या हो 
हम थोडे अलग से 
हल्के ढंग के जज्बाती ठहरे
पर इससे क्या 
हमारी यह हार हमे तोडती नही
तुम्हारी जीत सी भीतर 
हम हर हार से 
बनते जाते पुख्ता 
ओर अजीब 
जीवंतता से लेते है श्वासें 
जो नही नसीब 
तरकीब की जज्बाती जीत के हिस्से
छगन लाल गर्ग