Friday, June 10, 2016

अंतिम कतार

अंतिम कतार का व्यक्ति
जीसस की संवेदना पाया
ओर दुनिया की प्रतिष्ठित भीड
इसी संवेदना की पृष्ठभूमि
लेती रही विशाल आकार
कि अब लगता है वह
अंतिम कतार का अंश भी नही रहा
कौन कहता कि वह है मानव भी
उसकी जिन्दगी अब
पालतू कुत्तो से भी हुई बदतर
शौषण झेलता बंधुआ मजदूर
प्रगति का नित घिसता पहिया
जिसे उपयोगी रहने तक
काम लायक हवा से
चलाया जाता
कि पहली कतार की भीड
लेती रहे रफ्तार अपनी मनचाही
और पहिया बना रहे अपने आकार
न कम न ज्यादा
ले पाये विस्तार
मनुष्य का दर्जा देना
ओर अंतिम पंक्ति मे रखना
आज का सत्य नही
अब पहियों को ईश्वर के राज्य मे
प्रथम रहने का सपना
त्याग कर अपनी सार्थकता का संघर्ष
लडना होगा
मानव होने का सबूत देना होगा
नही लगता
ओर जीसस अवतरित होगा
ओर संवेदना से
प्रथम कतार मे स्थान देगा
हक मानव होने का
पहियों को स्वयं छिनना होगा
ऐसा ना हो
छलावे का जाल
मानवता का जाल ना बन जाये।
छगन लाल गर्ग।