देख चुका अतीत
अति समृद्ध मित्र का
दबदबा अहंमन्यता
अति झेलता विगत
नहीं रहा
झुर्रियाँ छायी बिगाड़ चुकी
तेजस्विता भरा व्यक्तित्व
नहीं हुआ जाता स्वतः खड़े भी
आया हूँ झिझक लिए
नही चाहता
छिड़ जाय बातों मे अतीत
संभलता लेता हूँ समाचार
तबीयत का बच्चों का
उदासी का घनत्व छितरा चेहरा
सब कहता जाता
बीमारी मात्र यही
नहीं लेते टोह अपने
एक अनचाही वस्तु सा
उपेक्षित पडा हैं व्यक्तित्व
देखता हूँ
नौकरी वाला पुत्र
आते ही बाप को
दोनों हाथ जोडते
याचना उकेरे शब्दों मे
कि लेता आये शाम लौटे
खान्शी की दवाइयाँ
मैं निहारने लगता हूँ सूर्य
दौपहरी चढ़ा
तीक्षण किरणे छेदती जाती
भीतर का ठोस धरातल
पिघलता द्रव्य बहना चाहता
पसीना बना
बेबूझ स्वर स्वर कहता
उठता हूँ
धूप गहरी हैं खाट छाये मे ले लो
देखता हूँ
नहीं होती प्रतिक्रिया
आवाज गहरे अनंत डूबी
लौटती बनती जाती
बार बार मेरे कानों की ध्वनि
लगता हैं अस्तित्व
खो चुके शून्य हुए
हम दोनों ।
छगन लाल गर्ग।
अति समृद्ध मित्र का
दबदबा अहंमन्यता
अति झेलता विगत
नहीं रहा
झुर्रियाँ छायी बिगाड़ चुकी
तेजस्विता भरा व्यक्तित्व
नहीं हुआ जाता स्वतः खड़े भी
आया हूँ झिझक लिए
नही चाहता
छिड़ जाय बातों मे अतीत
संभलता लेता हूँ समाचार
तबीयत का बच्चों का
उदासी का घनत्व छितरा चेहरा
सब कहता जाता
बीमारी मात्र यही
नहीं लेते टोह अपने
एक अनचाही वस्तु सा
उपेक्षित पडा हैं व्यक्तित्व
देखता हूँ
नौकरी वाला पुत्र
आते ही बाप को
दोनों हाथ जोडते
याचना उकेरे शब्दों मे
कि लेता आये शाम लौटे
खान्शी की दवाइयाँ
मैं निहारने लगता हूँ सूर्य
दौपहरी चढ़ा
तीक्षण किरणे छेदती जाती
भीतर का ठोस धरातल
पिघलता द्रव्य बहना चाहता
पसीना बना
बेबूझ स्वर स्वर कहता
उठता हूँ
धूप गहरी हैं खाट छाये मे ले लो
देखता हूँ
नहीं होती प्रतिक्रिया
आवाज गहरे अनंत डूबी
लौटती बनती जाती
बार बार मेरे कानों की ध्वनि
लगता हैं अस्तित्व
खो चुके शून्य हुए
हम दोनों ।
छगन लाल गर्ग।