करोगे स्वीकार मुझे
पढा लिखा बेरोजगार
सिखना चाहता काम
पेट के लिए
अपने जीवन से कर चुका
विश्वासघात पढ लिखकर
कसूर नही केवल मेरा
हर कोई लगता कसूरवार मुझे
अपने भी समझदार भी
ओर व्यवस्था मे जुटा
प्रशासन नीचे से ऊपर तक
नोकरी की आस मे
प्रशिक्षण लेने व पढने मे
बेच डाला घर बार बापू ने
कि बच्चा करेगा ऊँचा नाम भी
काम भी
बनेगा बडा ओहदेदार
बढा देगा इज्जत मेरी भी
खानदान की भी
नही कर पाया कुछ भी
जैक चैक बिना
केवल पढाई की ऊँची डिग्री
ओर हौशियारी
नही आई काम
तौड दिया बापू ने सदमे मे दम
अब बाकी तो छोडो
जीना चाहता
ओर इसी कारण
सिखना चाहता काम
शौरगुल होना भी अब
हो गया बंद शासन का
कौशल प्रशिक्षण का
अब ठोकरे खाता
दर दर काम निमित्त
करोगे स्वीकार मुझे ।
छगन लाल गर्ग ।
पढा लिखा बेरोजगार
सिखना चाहता काम
पेट के लिए
अपने जीवन से कर चुका
विश्वासघात पढ लिखकर
कसूर नही केवल मेरा
हर कोई लगता कसूरवार मुझे
अपने भी समझदार भी
ओर व्यवस्था मे जुटा
प्रशासन नीचे से ऊपर तक
नोकरी की आस मे
प्रशिक्षण लेने व पढने मे
बेच डाला घर बार बापू ने
कि बच्चा करेगा ऊँचा नाम भी
काम भी
बनेगा बडा ओहदेदार
बढा देगा इज्जत मेरी भी
खानदान की भी
नही कर पाया कुछ भी
जैक चैक बिना
केवल पढाई की ऊँची डिग्री
ओर हौशियारी
नही आई काम
तौड दिया बापू ने सदमे मे दम
अब बाकी तो छोडो
जीना चाहता
ओर इसी कारण
सिखना चाहता काम
शौरगुल होना भी अब
हो गया बंद शासन का
कौशल प्रशिक्षण का
अब ठोकरे खाता
दर दर काम निमित्त
करोगे स्वीकार मुझे ।
छगन लाल गर्ग ।