Monday, June 13, 2016

पढा लिखा बेरोजगार

करोगे स्वीकार मुझे 
पढा लिखा बेरोजगार 
सिखना चाहता काम 
पेट के लिए 
अपने जीवन से कर चुका 
विश्वासघात पढ लिखकर 
कसूर नही केवल मेरा 
हर कोई लगता कसूरवार मुझे 
अपने भी समझदार भी
ओर व्यवस्था मे जुटा
प्रशासन नीचे से ऊपर तक
नोकरी की आस मे
प्रशिक्षण लेने पढने मे
बेच डाला घर बार बापू ने
कि बच्चा करेगा ऊँचा नाम भी
काम भी
बनेगा बडा ओहदेदार 
बढा देगा इज्जत मेरी भी
खानदान की भी
नही कर पाया कुछ भी
जैक चैक बिना 
केवल पढाई की ऊँची डिग्री 
ओर हौशियारी 
नही आई काम
तौड दिया बापू ने सदमे मे दम
अब बाकी तो छोडो
जीना चाहता 
ओर इसी कारण 
सिखना चाहता काम 
शौरगुल होना भी अब
हो गया बंद शासन का
कौशल प्रशिक्षण का
अब ठोकरे खाता
दर दर काम निमित्त 
करोगे स्वीकार मुझे
छगन लाल गर्ग