बाकी नही हैं अब
आध्यात्मिक छलावा
पहले की तरह
अब नहीं सालता जीवन
कि डरता न कहूँ
हमराही निरंतर बढ़ते
खामोश सहमति पाता
अंगीकृत हुआ
छलावा भी ठावस तोष देता
अब यह भाव बना
पुष्ट हुआ हैं
स्थायित्व मिला
आश्वस्त हूँ काम देगा
साथी बनेगा मिटने के बाद
मंदिर की घंटिया
विभोर करती डूबो देती हैं
अचेतन की गहन ऊँचाईयो मे
सुधबुध भूल भूल
डोलता हूँ नित
अस्पष्ट आराध्य का आकार
सर्वाग बसाये
सत्य का यह छलावा
भाता हैं मुझे
छिपाता जाता प्रदेय
मनीषियो के परम वचन
जो रहते मेरी पहुँच से नित्य दूर
दुर्भाग्य मेरा
सत वचन लगते दूर की कौडी
अनुभव से परे
केवल अनुमान की गुंजाइश
का सामर्थ्य पाता हृदय मेरा
परिकल्पना मात्र मनाशक्ति की
ओर शब्द वचन
जीवन अनुभूतिओ को दबाते से
बौझिल हुआ हूँ
थका सा हूँ शब्दों की मार से
यह छलावा मेरा खुद को
अधिक सम्बल देता
हाथों की जलती अगरबती का
सुगंधित धुऑ
भीतर तक समर्पण की
सुगंध भरता हैं
अस्फुट शब्द भी आराध्य के
पूर्ण अर्थो की दिलाशा देते हैं
ओर एक मीठे अहसास से
घिरा तसल्ली पाता हूँ
अब यह छलावा ही सही
मेरे जीवन का सत्य बन
अंगीकृत हुआ हैं ।
छगन लाल गर्ग।
आध्यात्मिक छलावा
पहले की तरह
अब नहीं सालता जीवन
कि डरता न कहूँ
हमराही निरंतर बढ़ते
खामोश सहमति पाता
अंगीकृत हुआ
छलावा भी ठावस तोष देता
अब यह भाव बना
पुष्ट हुआ हैं
स्थायित्व मिला
आश्वस्त हूँ काम देगा
साथी बनेगा मिटने के बाद
मंदिर की घंटिया
विभोर करती डूबो देती हैं
अचेतन की गहन ऊँचाईयो मे
सुधबुध भूल भूल
डोलता हूँ नित
अस्पष्ट आराध्य का आकार
सर्वाग बसाये
सत्य का यह छलावा
भाता हैं मुझे
छिपाता जाता प्रदेय
मनीषियो के परम वचन
जो रहते मेरी पहुँच से नित्य दूर
दुर्भाग्य मेरा
सत वचन लगते दूर की कौडी
अनुभव से परे
केवल अनुमान की गुंजाइश
का सामर्थ्य पाता हृदय मेरा
परिकल्पना मात्र मनाशक्ति की
ओर शब्द वचन
जीवन अनुभूतिओ को दबाते से
बौझिल हुआ हूँ
थका सा हूँ शब्दों की मार से
यह छलावा मेरा खुद को
अधिक सम्बल देता
हाथों की जलती अगरबती का
सुगंधित धुऑ
भीतर तक समर्पण की
सुगंध भरता हैं
अस्फुट शब्द भी आराध्य के
पूर्ण अर्थो की दिलाशा देते हैं
ओर एक मीठे अहसास से
घिरा तसल्ली पाता हूँ
अब यह छलावा ही सही
मेरे जीवन का सत्य बन
अंगीकृत हुआ हैं ।
छगन लाल गर्ग।