पृथक हैं मेरा दीया
अन्य जलते दीयो से
यह हैं मिट्टी निर्मित
नहीं बना
सोने चान्दी ताम्बे या पीतल से
या अन्य
बहु मूल्य चमक देते धातुओ से
सृजक ने गढा मात्र मिट्टी लेकर
धूल का आकार हूँ मैं
मुझे अन्यो सी सुविधा नहीं
कि द्रव्यीभूत हुआ जलू
उबला हुआ घृत नहीं मुझमें
जो तुम्हारी दीयासलाई से
तुरंत जल उठे
थमा हुआ घृत पाया हैं मैंने
यही हैं मेरे प्राणों का घृत
तुम देते जाते हो
चिन्गारी की तपन
कि मैं जल उठू ओरो सा
प्रगाढ रोशनी के साथ
कैसे होगा यह
जलानी होगी प्राण से पहले देह
कुछ मिटे तन मेरा
जले अंश अस्तित्व का
तभी पीघलेगा प्राणों का घृत
तब समायेगा अस्तित्व मेरे
देह प्राणों की तरावट तो पाये
तभी जले दीया मेरा
ओर यह रोशनी
हैं ओरो से भिन्न
कंचन सी
सुरभि देती
मिट्टी ओर घृत से पनपी
स्वयं मिट्टी ने जल
प्राण पीघलाये
बिना घृत के
आराध्य के लिए
भीतरी उजाले के लिए
पिघला हैं प्राण
जागती जाती हैं चेतना
अच्छा लगता हैं
प्राणों का देह संग जलना
अनुभत रोशनी का हैं यह दीया
ऑधी से बुझने तक
स्मृति देगा अनुभत रोशनी की।
छगन लाल गर्ग।
अन्य जलते दीयो से
यह हैं मिट्टी निर्मित
नहीं बना
सोने चान्दी ताम्बे या पीतल से
या अन्य
बहु मूल्य चमक देते धातुओ से
सृजक ने गढा मात्र मिट्टी लेकर
धूल का आकार हूँ मैं
मुझे अन्यो सी सुविधा नहीं
कि द्रव्यीभूत हुआ जलू
उबला हुआ घृत नहीं मुझमें
जो तुम्हारी दीयासलाई से
तुरंत जल उठे
थमा हुआ घृत पाया हैं मैंने
यही हैं मेरे प्राणों का घृत
तुम देते जाते हो
चिन्गारी की तपन
कि मैं जल उठू ओरो सा
प्रगाढ रोशनी के साथ
कैसे होगा यह
जलानी होगी प्राण से पहले देह
कुछ मिटे तन मेरा
जले अंश अस्तित्व का
तभी पीघलेगा प्राणों का घृत
तब समायेगा अस्तित्व मेरे
देह प्राणों की तरावट तो पाये
तभी जले दीया मेरा
ओर यह रोशनी
हैं ओरो से भिन्न
कंचन सी
सुरभि देती
मिट्टी ओर घृत से पनपी
स्वयं मिट्टी ने जल
प्राण पीघलाये
बिना घृत के
आराध्य के लिए
भीतरी उजाले के लिए
पिघला हैं प्राण
जागती जाती हैं चेतना
अच्छा लगता हैं
प्राणों का देह संग जलना
अनुभत रोशनी का हैं यह दीया
ऑधी से बुझने तक
स्मृति देगा अनुभत रोशनी की।
छगन लाल गर्ग।