लौटोगे क्या अपने में
बहुत हुआ
कहां कहां नहीं गये हो
हर चमक की तरफ
ऑखो की उतेजना में
चाहत का नशा कितना मादक
हर अंदाज मे
एक नूर एक जज्बा उमंग लिए
आशा की मीठास का अहसास
ओर एक प्राप्ति आशा का उन्माद
बहुत बार
बार बार अकड ओर ऐंठ लिए
चला चलता रहा आज तक
यह नहीं कहता कि नहीं पाया नूर
हां कहता हूँ पाया
पर यह पाया अनपाया ही नहीं
थोड़ा अधिक तृष्णा भरा
पहले से अधिक अतृप्ति का अहसास
लेकर बढता जाता
ओर आगे कुछ पाने की ललक
हर तरफ दौडता जाता निगाहे
अपनी काबलियत को अहसास करता
अवसर से पहले साबित करता
बढना चाहता आगे
पद का नूर दौलत का नूर
ओर अदृश्य मे समाया सारा नूर
मेरी काबलियत है हकदार पाने की
ओर यह पाना
लूटना रहा अधिक तर
जैसे जैसे पाता हूँ काबलियत अहसास का हक
होता जाता हूँ दूर
स्व से
चमक देता तन प्रदर्शित हैं
भीतर का जड हुआ स्पंदन
रूदन का दरिया हिलोर लेता अबाध
करूणा का करूणालय बना जीवन
लौटोगे क्या अपने मे
निर्मल स्व नेह का तुम्हारा अपनत्व
बुलाता हैं तुम्हें ।
बहुत हुआ
कहां कहां नहीं गये हो
हर चमक की तरफ
ऑखो की उतेजना में
चाहत का नशा कितना मादक
हर अंदाज मे
एक नूर एक जज्बा उमंग लिए
आशा की मीठास का अहसास
ओर एक प्राप्ति आशा का उन्माद
बहुत बार
बार बार अकड ओर ऐंठ लिए
चला चलता रहा आज तक
यह नहीं कहता कि नहीं पाया नूर
हां कहता हूँ पाया
पर यह पाया अनपाया ही नहीं
थोड़ा अधिक तृष्णा भरा
पहले से अधिक अतृप्ति का अहसास
लेकर बढता जाता
ओर आगे कुछ पाने की ललक
हर तरफ दौडता जाता निगाहे
अपनी काबलियत को अहसास करता
अवसर से पहले साबित करता
बढना चाहता आगे
पद का नूर दौलत का नूर
ओर अदृश्य मे समाया सारा नूर
मेरी काबलियत है हकदार पाने की
ओर यह पाना
लूटना रहा अधिक तर
जैसे जैसे पाता हूँ काबलियत अहसास का हक
होता जाता हूँ दूर
स्व से
चमक देता तन प्रदर्शित हैं
भीतर का जड हुआ स्पंदन
रूदन का दरिया हिलोर लेता अबाध
करूणा का करूणालय बना जीवन
लौटोगे क्या अपने मे
निर्मल स्व नेह का तुम्हारा अपनत्व
बुलाता हैं तुम्हें ।