घने अध्ययन पश्चात
पाया हूँ उपाधिया
हर शास्त्र से झूझा
रात दिन
तब मिल पायी डिग्रीया
महसूस करता
अकेले मे ज्ञान भरा
समाज के अन्यो की तुलना
पाता स्वयं विवेक भरा
आकंठ भर चुका
ज्ञान की रश्मिया
नहीं गुजाईश
आ पाये समाने लायक
अनुभव का ताजापन
हो जाता हूँ अनमना
जब जिन्दगी मागती नये इम्तहान
जो न पढ़े कभी न सुने कभी
हताश हो जाता
डिग्रीया अकड तो देती पर
जीवन जीने की शैली
अधूरी रह जाती
क्या हो
जीना तो जिन्दगी हैं
ओर नकारा हो रही
ज्ञान का सबूत देती
उपाधिया।
छगन लाल गर्ग।
पाया हूँ उपाधिया
हर शास्त्र से झूझा
रात दिन
तब मिल पायी डिग्रीया
महसूस करता
अकेले मे ज्ञान भरा
समाज के अन्यो की तुलना
पाता स्वयं विवेक भरा
आकंठ भर चुका
ज्ञान की रश्मिया
नहीं गुजाईश
आ पाये समाने लायक
अनुभव का ताजापन
हो जाता हूँ अनमना
जब जिन्दगी मागती नये इम्तहान
जो न पढ़े कभी न सुने कभी
हताश हो जाता
डिग्रीया अकड तो देती पर
जीवन जीने की शैली
अधूरी रह जाती
क्या हो
जीना तो जिन्दगी हैं
ओर नकारा हो रही
ज्ञान का सबूत देती
उपाधिया।
छगन लाल गर्ग।