मन करता हैं
अन्तराल बीच कटता जीवन
कभी कभी विगत भटकता हैं
ओर चाहता अपनों की छाँव
जहां जीवन खेला था नित नयी अठखेलिया
अपनों के साथ घनी आत्मीयता लिए
स्वार्थ का बंवडर अंधी बाढ़ लिए
निश्छल स्नेह सरिता को गंदला कर बहा
भयानक विध्वंस लिए
कठोर निर्मम चित अडे रहे विध्वंस बीच
नदी के द्वीप की तरह
बने रहे अडिग बहते देखते गर्व भरे
कोमल गात वृक्षों कच्ची दीवारों बने घरों को बहते
आनन्द प्रभुता के मद इतराये से
जो कि कभी उनके रहे हिमायती आधार
वर्चस्व मोह सम्पत्ति एकाधिकार स्वार्थ मे
खुद धक्का देते
धकेला दोनों हाथों
बहती विनाश धारा मे
उस विध्वंस धार का बचा अवशेष हूँ मैं
जिसने पड़ाव पा बनाया नया नीड आशा का
विश्वास संग श्रृद्धा का नेह निर्माण का
संचित स्नेह अब गहराया हैं
ओर चाहने लगा हैं बार बार
दुखद विगत पलो की वापसी
जहां संबंधो की ज्वाला स्वार्थ अग्नि जली
रक्त संबंध तार तार हो बिखरे बहे जले
समय की परते लाख ढके
उभर उभर टीस कसक देते
फिर भी
यह मन भटकता हैं
पाना चाहता फिर फिर अपनों की छाँव ।
छगन लाल गर्ग।
अन्तराल बीच कटता जीवन
कभी कभी विगत भटकता हैं
ओर चाहता अपनों की छाँव
जहां जीवन खेला था नित नयी अठखेलिया
अपनों के साथ घनी आत्मीयता लिए
स्वार्थ का बंवडर अंधी बाढ़ लिए
निश्छल स्नेह सरिता को गंदला कर बहा
भयानक विध्वंस लिए
कठोर निर्मम चित अडे रहे विध्वंस बीच
नदी के द्वीप की तरह
बने रहे अडिग बहते देखते गर्व भरे
कोमल गात वृक्षों कच्ची दीवारों बने घरों को बहते
आनन्द प्रभुता के मद इतराये से
जो कि कभी उनके रहे हिमायती आधार
वर्चस्व मोह सम्पत्ति एकाधिकार स्वार्थ मे
खुद धक्का देते
धकेला दोनों हाथों
बहती विनाश धारा मे
उस विध्वंस धार का बचा अवशेष हूँ मैं
जिसने पड़ाव पा बनाया नया नीड आशा का
विश्वास संग श्रृद्धा का नेह निर्माण का
संचित स्नेह अब गहराया हैं
ओर चाहने लगा हैं बार बार
दुखद विगत पलो की वापसी
जहां संबंधो की ज्वाला स्वार्थ अग्नि जली
रक्त संबंध तार तार हो बिखरे बहे जले
समय की परते लाख ढके
उभर उभर टीस कसक देते
फिर भी
यह मन भटकता हैं
पाना चाहता फिर फिर अपनों की छाँव ।
छगन लाल गर्ग।