नेह का इजहार
प्राण से भिगोये शब्दों मे
तरबतर भीगे
पडते हैं कानों मे
लगता हैं हमारी युवा पीढ़ी
सारी सीमाओ की तोडती
डूबना चाहती हैं
प्रेम की झील
जहां भावों के कुसुम
सुरभि देते हैं
पढ़ता प्रेम के सूत्र
रूबाइया शायरिया ओर कविताये
अच्छा लगता हैं
लुभाती जाती दिल
अहसास सत्यता
पाता तब हूँ
जब सुगंध की लहरे
पहुँचती नासिका तक
खुशबू वहीं
खरीदी बाजार की
बनी बनी
हाटो बिकती हैं
बड़ा मुश्किल होता हैं
पहचान पाना
स्वयं कंचन हुए बिना
सच्ची प्रेम की खुशबू
स्वयं जले बिना
निखरे बिना
संभव नही
आज का नेह हुआ जाता
मात्र
दिखावा शायरियो का
विमोहित करते बाजारू साधनों का
नेह तो वहीं
जो जला हो
तपा हो
मूक होजिसमें ऑकाक्षा की
चाह शून्य हो।
छगन लाल गर्ग।
प्राण से भिगोये शब्दों मे
तरबतर भीगे
पडते हैं कानों मे
लगता हैं हमारी युवा पीढ़ी
सारी सीमाओ की तोडती
डूबना चाहती हैं
प्रेम की झील
जहां भावों के कुसुम
सुरभि देते हैं
पढ़ता प्रेम के सूत्र
रूबाइया शायरिया ओर कविताये
अच्छा लगता हैं
लुभाती जाती दिल
अहसास सत्यता
पाता तब हूँ
जब सुगंध की लहरे
पहुँचती नासिका तक
खुशबू वहीं
खरीदी बाजार की
बनी बनी
हाटो बिकती हैं
बड़ा मुश्किल होता हैं
पहचान पाना
स्वयं कंचन हुए बिना
सच्ची प्रेम की खुशबू
स्वयं जले बिना
निखरे बिना
संभव नही
आज का नेह हुआ जाता
मात्र
दिखावा शायरियो का
विमोहित करते बाजारू साधनों का
नेह तो वहीं
जो जला हो
तपा हो
मूक होजिसमें ऑकाक्षा की
चाह शून्य हो।
छगन लाल गर्ग।