नहीं आवश्यक
हर शब्द दे सके रस
बढा दुर्भाग्य शब्दो का भी
चलना होता व्यक्ति जीवन के साथ
ओर हर अनुभूति
नही हो पाती सरस
बहु आयामी हर क्षण देता
नया दंश नयी विकल दशा
क्या हो
शब्द नही बदलते शक्ल
रस भरी
यह कहना होगा विवशता मे
कविता रस नही
अनुभूति का राग विराग
शायद सत्य यही ।
छगन लाल गर्ग ।
हर शब्द दे सके रस
बढा दुर्भाग्य शब्दो का भी
चलना होता व्यक्ति जीवन के साथ
ओर हर अनुभूति
नही हो पाती सरस
बहु आयामी हर क्षण देता
नया दंश नयी विकल दशा
क्या हो
शब्द नही बदलते शक्ल
रस भरी
यह कहना होगा विवशता मे
कविता रस नही
अनुभूति का राग विराग
शायद सत्य यही ।
छगन लाल गर्ग ।