अब बस भी करो
हृदय हार चुका पथ
मुस्कान गगन देना भूला
धुंध घिरी घनी घटा टोप हुआ
अंधेरा रहस्यमय छाया साथी
अब आस कहां
होती होगी
किरणें विश्वास नहीं
तम भेद हृदय जो छा जाये
नव कुसुम नेह आभा लेकर
जीवन पथ मे छा जाये
कहीं और कहो
अपना पथ अब अंधेरे भरा
रश्मि समेटे चले गये
अकेलेपन का सार भरा
हमराही जीवन दे गये
पद्चाप चिन्ह खोजू साथी
अंधेरा घना मिलते ही नही
सच कहो ना बिछडे मितवा
राह किस चले गये
आना चाहू कदम चाप पाये
संकेत स्वप्न कहते जाओ
जलजात जीवन विरह विषम
वेदना का वार विषम
मिटने की चाह गहरी
भीतर जल रही आग गहरी
जल न जाये देह प्रियतम
दूर गगन से संकेत कर दो
प्राण का एक राग दे दो
अदृश्य डौर भेजो न मितवा
प्राण संतप्त दौड आना चाहे
नहीं रे अब सार मुझमें
जग मोह का कुछ राग मुझमें
देह प्राण द्रव्य बन बह रहे है
ढूंढते है ताल गहरा
अंश विलय अब ध्येय लेकर
गगन सम चाहें किनारा
आवाज दो ना साथी मेरे
ध्वनि पथ का पाऊ सहारा
पहूंच पाऊ तुम तक
शिकवे सारे तब कह देना
अब बस भी करो।
छगन लाल गर्ग।
हृदय हार चुका पथ
मुस्कान गगन देना भूला
धुंध घिरी घनी घटा टोप हुआ
अंधेरा रहस्यमय छाया साथी
अब आस कहां
होती होगी
किरणें विश्वास नहीं
तम भेद हृदय जो छा जाये
नव कुसुम नेह आभा लेकर
जीवन पथ मे छा जाये
कहीं और कहो
अपना पथ अब अंधेरे भरा
रश्मि समेटे चले गये
अकेलेपन का सार भरा
हमराही जीवन दे गये
पद्चाप चिन्ह खोजू साथी
अंधेरा घना मिलते ही नही
सच कहो ना बिछडे मितवा
राह किस चले गये
आना चाहू कदम चाप पाये
संकेत स्वप्न कहते जाओ
जलजात जीवन विरह विषम
वेदना का वार विषम
मिटने की चाह गहरी
भीतर जल रही आग गहरी
जल न जाये देह प्रियतम
दूर गगन से संकेत कर दो
प्राण का एक राग दे दो
अदृश्य डौर भेजो न मितवा
प्राण संतप्त दौड आना चाहे
नहीं रे अब सार मुझमें
जग मोह का कुछ राग मुझमें
देह प्राण द्रव्य बन बह रहे है
ढूंढते है ताल गहरा
अंश विलय अब ध्येय लेकर
गगन सम चाहें किनारा
आवाज दो ना साथी मेरे
ध्वनि पथ का पाऊ सहारा
पहूंच पाऊ तुम तक
शिकवे सारे तब कह देना
अब बस भी करो।
छगन लाल गर्ग।