फिर फिर आता नवल प्रभात ।
मिट मिट जाता तिमिर का गात।
सोता जगता जीवन का उत्पात।
भरता नित प्राण रागमय प्रपात।
कविता सृजन का यह समुदाय ।
ललित काव्य सृजन मे हैं सहाय ।
कुशल चितेरे प्रेरक बन देते हैं राय ।
भाव उभर शब्द बने होते गतिदाय ।।
छगनलाल गर्ग।
मिट मिट जाता तिमिर का गात।
सोता जगता जीवन का उत्पात।
भरता नित प्राण रागमय प्रपात।
कविता सृजन का यह समुदाय ।
ललित काव्य सृजन मे हैं सहाय ।
कुशल चितेरे प्रेरक बन देते हैं राय ।
भाव उभर शब्द बने होते गतिदाय ।।
छगनलाल गर्ग।