रूकना तो होगा
शिथिल कदम देते भेद
भीतर शायद समझे
बेतहाशा दौड़ना कब तक
नहीं संभव
ओर थकान आभास भी
नहीं तैयार मानने
हठिला अहंकार
अजीब जीवट लिए संतप्त
यह जीवन
एक आवरण चमकदार चाहता
जो विपरीत अवस्था ढकता
ओर छिपे रहे जर्जर घाव
रीसते जख्म खाये
अंदर बाहर दशा अंतराल
बड़ी जोखिम
अहंकार बरकार रहे लक्ष्य
ओर दुआऐं करता रहता परमात्मा
बनायें रखना आबरू मेरी
कि जी सकूँ
व्यवहारिक जीवन मे वर्चस्व बनाये
ओर यह तभी संभव
जब दिखूँ ढका ढका
गरिमा पूर्ण
भीतर की गंदगी ना दिखे
शिथिलता ढक जाये वैभव चमक
ओर दुर्गंध रोक सकँ
विदेशी परफ्यूम
कृपा मात्र इतनी देना
कि ना हो सके प्रकट
मेरी असलियत
देखो पूरी ताकत का दांव
कि ना हो रूकना
बनावटी जिन्दगी का
हाँ मित्रों का सहयोग
अप्रकट चाहता
अगर मिल सके।
छगन लाल गर्ग ।
शिथिल कदम देते भेद
भीतर शायद समझे
बेतहाशा दौड़ना कब तक
नहीं संभव
ओर थकान आभास भी
नहीं तैयार मानने
हठिला अहंकार
अजीब जीवट लिए संतप्त
यह जीवन
एक आवरण चमकदार चाहता
जो विपरीत अवस्था ढकता
ओर छिपे रहे जर्जर घाव
रीसते जख्म खाये
अंदर बाहर दशा अंतराल
बड़ी जोखिम
अहंकार बरकार रहे लक्ष्य
ओर दुआऐं करता रहता परमात्मा
बनायें रखना आबरू मेरी
कि जी सकूँ
व्यवहारिक जीवन मे वर्चस्व बनाये
ओर यह तभी संभव
जब दिखूँ ढका ढका
गरिमा पूर्ण
भीतर की गंदगी ना दिखे
शिथिलता ढक जाये वैभव चमक
ओर दुर्गंध रोक सकँ
विदेशी परफ्यूम
कृपा मात्र इतनी देना
कि ना हो सके प्रकट
मेरी असलियत
देखो पूरी ताकत का दांव
कि ना हो रूकना
बनावटी जिन्दगी का
हाँ मित्रों का सहयोग
अप्रकट चाहता
अगर मिल सके।
छगन लाल गर्ग ।