अनंत आकाश सिमट कर
परछाई बना
साथ ही
गुलमोहर के ताजा
लालिमा देते
फूलों को संग लेकर
उतर आया
आज सुबह
मेरे चाय की कटोरी मे
सरकती चाय के
हर घूँट मे
पीने लगा हूँ आकाश
अनंत
अच्छा अहसास होता
गरिमा की
अनंत ऊँचाई चढा
आज मेरा व्यक्तित्व
सोचने लगा हूँ
शायद यही तरीका रह गया
अब
अरमान पूर्ण करने का
सिखना होगा जीना
परछाईयों के साथ
आम आदमी के अच्छे सपने
उसके अच्छे दिन
उसका यथार्थ
इसी तरह
परछाईयों से होता जीना
आज के युग
हकीकत यही
अब भीड़ के नेतृत्व मे
समा गयी
ओर हर भीड़ बेचारी
सुख छलावे की
आकाशिय परछाई के
नेतृत्व से कर लेती समझोता
अपना मताधिकार देकर
ओर फिर परिणाम यही
कि बिना दूध की चाय मे
उतर आता
अनंत ऊँचाईयां देता
आकाश
गरिमा युक्त छल
भोगते इसी को
बुझानी होती
पेट की भूख
या कि स्वाभिमान बैचते
मजबूर होते जीने
देशी कुत्तों सी जिन्दगी
चलो यही ठीक
आत्मनिर्भर देश मे होता
थोड़ा सा
गर्व करो ओर कहो
भारत माता की जय
अहोभाग्य हिंदुस्तानी हो
मत भरो निश्वास
आयेगा समय करों इंतजार
तब तक मानो सत्य छलावा
हर अभाव ईश्वरीय
विवशता तुम्हारी भाग्य का छलवा
यही तकदीर यहीं सत्य इस युग का ।
छगन लाल गर्ग ।
परछाई बना
साथ ही
गुलमोहर के ताजा
लालिमा देते
फूलों को संग लेकर
उतर आया
आज सुबह
मेरे चाय की कटोरी मे
सरकती चाय के
हर घूँट मे
पीने लगा हूँ आकाश
अनंत
अच्छा अहसास होता
गरिमा की
अनंत ऊँचाई चढा
आज मेरा व्यक्तित्व
सोचने लगा हूँ
शायद यही तरीका रह गया
अब
अरमान पूर्ण करने का
सिखना होगा जीना
परछाईयों के साथ
आम आदमी के अच्छे सपने
उसके अच्छे दिन
उसका यथार्थ
इसी तरह
परछाईयों से होता जीना
आज के युग
हकीकत यही
अब भीड़ के नेतृत्व मे
समा गयी
ओर हर भीड़ बेचारी
सुख छलावे की
आकाशिय परछाई के
नेतृत्व से कर लेती समझोता
अपना मताधिकार देकर
ओर फिर परिणाम यही
कि बिना दूध की चाय मे
उतर आता
अनंत ऊँचाईयां देता
आकाश
गरिमा युक्त छल
भोगते इसी को
बुझानी होती
पेट की भूख
या कि स्वाभिमान बैचते
मजबूर होते जीने
देशी कुत्तों सी जिन्दगी
चलो यही ठीक
आत्मनिर्भर देश मे होता
थोड़ा सा
गर्व करो ओर कहो
भारत माता की जय
अहोभाग्य हिंदुस्तानी हो
मत भरो निश्वास
आयेगा समय करों इंतजार
तब तक मानो सत्य छलावा
हर अभाव ईश्वरीय
विवशता तुम्हारी भाग्य का छलवा
यही तकदीर यहीं सत्य इस युग का ।
छगन लाल गर्ग ।