कहां देते हैं संबल
अनुभूति अधूरी हुई प्रश्न देती हैं
ओर टटोलने लगती हैं अतीत
जिसमें जिये हैं रक्तिल रिश्ते
सहा असीम भावनाओं का उफान
ओर रौदा गया अस्तित्व चित्रमय होता हैं
उखाड़ फैके रिश्तों की टीस
भरभरा उठती हैं
जहाँ दिखाई देती हैं बँटवारे की लकीरे
अलगाव की कहानी कहती सी
समझ का यह खेल
टूटी भावनाओं के साथ
लडखडाई जिन्दगी जीता सत्य
दिख जाता हैं
मेरा भी तुम्हारा भी
नयी दीवारो का सच नित्य देता हैं संकेत
स्वार्थ की सीढ़ी चढने की शैली
कि रिश्तों के कंधों को बेसहारा किये
संजोये सपने हो सके पूरे
यह दृश्य भोली ऑखे संजोति जाती
स्मृति कोष
जिसे वक्त आने पर
भुगतना हमारी ही गति की
परिणति होगी
क्या इस अनुभूति को अधूरी कहूँ
प्रश्न निरूतर जवाब चाहता हैं ।
छगन लाल गर्ग।
अनुभूति अधूरी हुई प्रश्न देती हैं
ओर टटोलने लगती हैं अतीत
जिसमें जिये हैं रक्तिल रिश्ते
सहा असीम भावनाओं का उफान
ओर रौदा गया अस्तित्व चित्रमय होता हैं
उखाड़ फैके रिश्तों की टीस
भरभरा उठती हैं
जहाँ दिखाई देती हैं बँटवारे की लकीरे
अलगाव की कहानी कहती सी
समझ का यह खेल
टूटी भावनाओं के साथ
लडखडाई जिन्दगी जीता सत्य
दिख जाता हैं
मेरा भी तुम्हारा भी
नयी दीवारो का सच नित्य देता हैं संकेत
स्वार्थ की सीढ़ी चढने की शैली
कि रिश्तों के कंधों को बेसहारा किये
संजोये सपने हो सके पूरे
यह दृश्य भोली ऑखे संजोति जाती
स्मृति कोष
जिसे वक्त आने पर
भुगतना हमारी ही गति की
परिणति होगी
क्या इस अनुभूति को अधूरी कहूँ
प्रश्न निरूतर जवाब चाहता हैं ।
छगन लाल गर्ग।