चौंट खायी अभिव्यक्ति
बिना अपनत्व
चाहती पहचान
गुणवता छोड
विख्यातपन की
भावों का क्या
आमजन भावना नहीं रखती
अस्तित्व
यथार्थ जीवन नहीं होता
सामान्य जन का
पहचान पाते चेतना की
विवेक हमारे
ओर यह होता कहां
आम जन के पास
फिर कैसे कहे
रखती कद्र
विद्वानों बीच
आम जन के जीवन की
अभिव्यक्ति
चौंट खायी कसक झेलती
जीने लगी
चौंट खायी अभिव्यक्ति।
छगन लाल गर्ग।
बिना अपनत्व
चाहती पहचान
गुणवता छोड
विख्यातपन की
भावों का क्या
आमजन भावना नहीं रखती
अस्तित्व
यथार्थ जीवन नहीं होता
सामान्य जन का
पहचान पाते चेतना की
विवेक हमारे
ओर यह होता कहां
आम जन के पास
फिर कैसे कहे
रखती कद्र
विद्वानों बीच
आम जन के जीवन की
अभिव्यक्ति
चौंट खायी कसक झेलती
जीने लगी
चौंट खायी अभिव्यक्ति।
छगन लाल गर्ग।