प्रवचन भार जीवन पीसता निरन्तर
स्वभाव छटपटाहट दबाव रहे अंतर
धिक्कार तू जीवन स्वच्छन्द अपार
भूल स्व बन आदर्शधारक लगातार ।
तय हैं माप दण्ड जीवन तेरे
छोड़ विवेक उपदेश ले मेरे
कर वहीं समाज हित हो सारे
मनन क्यों क्या काम प्यारे
स्वभाव छटपटाहट दबाव रहे अंतर
धिक्कार तू जीवन स्वच्छन्द अपार
भूल स्व बन आदर्शधारक लगातार ।
तय हैं माप दण्ड जीवन तेरे
छोड़ विवेक उपदेश ले मेरे
कर वहीं समाज हित हो सारे
मनन क्यों क्या काम प्यारे