यात्रा मेरी अधूरी रही
उफान का नतीजा यह
कि उबला घना
व्यर्थ व्यर्थ बिना भाप हुए
थोड़ी सी उष्मा पाकर
पात्र को कहां संभाल पाया
ओर गिरता रहा
आग दोजग की
पाता रहा मिटता रहा
समूल पाने की चाह का
छलकना यह
व्यर्थ रहा
गर्माहट का अस्तित्व
यात्रा का अंश न बन सका
फिजूल बहा
अब रहा बचा नीर
शीतल ओर सौम्य ठहरा सा
वेदना का दरिया सा
कभी कभार
गहराई चाहे
कि कोई नीर धारा
निर्मल सी
शान्त मना भीतरी सुख का तंरगित प्रवाह
समाये
करे गहरा मुझे
कि यात्रा मेरी
अधूरी न रहे।
छगन लाल गर्ग।
उफान का नतीजा यह
कि उबला घना
व्यर्थ व्यर्थ बिना भाप हुए
थोड़ी सी उष्मा पाकर
पात्र को कहां संभाल पाया
ओर गिरता रहा
आग दोजग की
पाता रहा मिटता रहा
समूल पाने की चाह का
छलकना यह
व्यर्थ रहा
गर्माहट का अस्तित्व
यात्रा का अंश न बन सका
फिजूल बहा
अब रहा बचा नीर
शीतल ओर सौम्य ठहरा सा
वेदना का दरिया सा
कभी कभार
गहराई चाहे
कि कोई नीर धारा
निर्मल सी
शान्त मना भीतरी सुख का तंरगित प्रवाह
समाये
करे गहरा मुझे
कि यात्रा मेरी
अधूरी न रहे।
छगन लाल गर्ग।