Wednesday, June 8, 2016

स्मृति सत्य

स्मृति सत्य नही 
एक अतीत का भोगा हुआ समय
जिस पर नही कब्जा 
वर्तमान का 
बीता हुआ हर अनुभव 
कैसे स्वीकार करू आज
हर पल बढता आगे
अतीत रौदता
स्वागत करना होगा जीवंत क्षण
नही आवश्यकता कि हो
जीवन रस से ओत प्रोत
मृत्यु को आमंत्रण देते पल
उत्सुक है
आने दो देह ओर प्राणों का
अंतिम उन्माद पलों का
यह संगम
नव यात्रा के नव चेतन का
भव्य संदेश
स्मृति त्याग पर निर्भर
होना होगा मुझे
जीवंत में अविलम्ब सामिल ।
छगनलाल गर्ग ।